हिसार। जिले में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स-2026 को सख्ती से लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है। मंगलवार, 6 अक्तूबर को उपायुक्त महेंद्र पाल ने नगर निगम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, स्वास्थ्य, पंचायत और दूसरे विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर बड़े कचरा उत्पादक संस्थानों का रजिस्ट्रेशन और नियमों की पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
नए नियमों में हर होटल, अस्पताल या सोसायटी को अपने आप रजिस्ट्रेशन नहीं कराना है। कोई संस्था तभी बल्क वेस्ट जेनरेटर मानी जाएगी, जब उसका भवन क्षेत्रफल 20 हजार वर्गमीटर या उससे अधिक हो, रोज 40 हजार लीटर या उससे ज्यादा पानी इस्तेमाल होता हो या वहां प्रतिदिन 100 किलो या उससे अधिक ठोस कचरा निकलता हो। इनमें से केवल एक शर्त पूरी होना भी काफी है।
किन होटल-अस्पताल-सोसायटी को कराना होगा रजिस्ट्रेशन?
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स-2026 में बड़े कचरा उत्पादकों के लिए तीन सीमाएं तय की गई हैं।
किसी संस्था का भवन क्षेत्रफल 20,000 वर्गमीटर या ज्यादा है, रोजाना पानी की खपत 40,000 लीटर या ज्यादा है या रोज 100 किलो या ज्यादा ठोस कचरा निकलता है तो वह बल्क वेस्ट जेनरेटर के दायरे में आ सकती है। तीनों शर्तें पूरी होना जरूरी नहीं है। एक शर्त पूरी होने पर भी नियम लागू होगा।
इसमें बड़े होटल, अस्पताल, नर्सिंग होम, हॉस्टल, मॉल, रेस्टोरेंट, मैरिज और बैंक्वेट हॉल, मंडी, स्कूल-कॉलेज, विश्वविद्यालय, सरकारी संस्थान, निजी कंपनियां और आवासीय सोसायटी भी शामिल हो सकती हैं।
यानी किसी छोटे होटल या अस्पताल को केवल उसके व्यवसाय की श्रेणी देखकर बल्क वेस्ट जेनरेटर नहीं माना जाएगा। उसकी जगह, पानी की खपत और रोज निकलने वाले कचरे में से तय सीमा देखी जाएगी।
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कचरा रजिस्ट्रेशन कहां और कैसे होगा?
बल्क वेस्ट जेनरेटर को संबंधित स्थानीय निकाय के साथ केंद्रीय ऑनलाइन सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट पोर्टल के जरिए रजिस्ट्रेशन कराना है। सीपीसीबी ने इसके लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की सुविधा शुरू कर रखी है।
रजिस्ट्रेशन की शुरुआत संस्था के नाम, अधिकृत व्यक्ति का नाम, ईमेल और मोबाइल नंबर से होती है। मोबाइल पर ओटीपी सत्यापन के बाद आवेदन का अगला हिस्सा भरा जाता है। पोर्टल पर प्रक्रिया अकाउंट बनाने, आवेदन भरने, जानकारी सत्यापित करने, नियम स्वीकार करने और आखिर में पावती प्राप्त करने के चरणों में दी गई है।
रजिस्ट्रेशन के बाद मिलने वाले प्रमाणपत्र में उन शर्तों का भी उल्लेख होगा जिन्हें संस्था को पूरा करना होगा। बाद में रजिस्ट्रेशन के समय दी गई जानकारी में कोई बदलाव होता है तो उसकी सूचना स्थानीय निकाय को देनी होगी।
क्या सामान्य घरों को भी ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना होगा?
सामान्य घर के लिए बल्क वेस्ट जेनरेटर वाला ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन नहीं है, जब तक वह ऊपर दी गई सीमा में आने वाली किसी संस्था का हिस्सा नहीं है। लेकिन घरों और दूसरे सभी कचरा उत्पादकों के लिए कचरे को स्रोत पर अलग रखने का नियम लागू है।
केंद्र सरकार के नियमों में कचरे को चार हिस्सों में बांटा गया है—गीला कचरा, सूखा कचरा, सैनिटरी कचरा और विशेष देखभाल वाला कचरा।
रसोई और खाने से निकलने वाला कचरा गीले कचरे में आएगा। प्लास्टिक, कांच, कागज और धातु जैसी चीजें सूखे कचरे में रहेंगी। डायपर और सैनिटरी पैड जैसे कचरे को अलग रखना होगा।
पेंट के डिब्बे, कीटनाशक के कंटेनर, बल्ब-ट्यूबलाइट, एक्सपायर दवाइयां, टूटे पारा थर्मामीटर और इस्तेमाल की गई सुई जैसी चीजें विशेष देखभाल वाले कचरे में आती हैं। सीपीसीबी के नियमों में ई-कचरे को अलग नियमों के तहत रखा गया है।
सोसायटी छोटी है लेकिन क्षेत्रफल 5 हजार वर्गमीटर से ज्यादा है तो क्या नियम लागू होगा?
यहां बल्क वेस्ट जेनरेटर के रजिस्ट्रेशन और सामान्य कचरा प्रबंधन की जिम्मेदारी में फर्क है।
किसी सोसायटी को बल्क वेस्ट जेनरेटर के रूप में रजिस्ट्रेशन कराने के लिए 20 हजार वर्गमीटर, 40 हजार लीटर पानी या 100 किलो रोजाना कचरे वाली सीमा देखी जाएगी।
लेकिन नए नियमों में 5 हजार वर्गमीटर से अधिक क्षेत्र वाली गेटेड सोसायटी और संस्थानों, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन, मार्केट एसोसिएशन, होटल और रेस्टोरेंट के लिए कचरे को स्रोत पर अलग करने और स्थानीय निकाय के साथ मिलकर उसके प्रबंधन की अलग जिम्मेदारी भी दी गई है। जहां संभव हो, जैविक कचरे की कम्पोस्टिंग या बायो-मीथेनेशन के जरिए परिसर में ही उपचार व्यवस्था करनी होगी।
इसलिए 20 हजार वर्गमीटर से कम होने का मतलब यह नहीं है कि सोसायटी या संस्थान पर कचरा अलग करने के नियम लागू नहीं होंगे।
रजिस्ट्रेशन के बाद बड़े संस्थानों को क्या करना होगा?
रजिस्ट्रेशन करा देना ही पूरी प्रक्रिया नहीं है। बल्क वेस्ट जेनरेटर को सूखे, सैनिटरी और विशेष देखभाल वाले कचरे को अलग इकट्ठा करके स्थानीय निकाय या उसकी अधिकृत एजेंसी को देना होगा।
गीले और बागवानी कचरे के लिए कम्पोस्टिंग, बायो-मीथेनेशन या दूसरी मान्य तकनीक से प्रसंस्करण और निस्तारण की व्यवस्था करनी होगी। नए बल्क वेस्ट जेनरेटर के लिए अपनी क्षमता के अनुसार गीले कचरे की प्रोसेसिंग व्यवस्था बनाने का नियम है।
पहले से चल रही किसी संस्था के लिए ऐसी व्यवस्था बनाना संभव नहीं है तो नियमों में स्थानीय निकाय के जरिए दूसरी अधिकृत व्यवस्था से कचरे का प्रबंधन कराने का प्रावधान भी रखा गया है।
नियमों में यह भी कहा गया है कि बल्क वेस्ट जेनरेटर कचरा प्रबंधन के लिए ऐसी एजेंसी से काम नहीं करा सकता, जिसके पास जरूरी अनुमति या रजिस्ट्रेशन नहीं है।
क्या हर साल कचरे का हिसाब भी देना होगा?
रजिस्टर्ड बल्क वेस्ट जेनरेटर को हर साल अपने कचरे और उसके उपचार से जुड़ी जानकारी ऑनलाइन देनी होगी।
नियमों के अनुसार 30 जून तक वार्षिक रिटर्न केंद्रीय ऑनलाइन पोर्टल पर जमा करना है। इसमें कचरे की मात्रा और उसके प्रबंधन से जुड़ी जानकारी शामिल होगी।
स्थानीय निकायों को भी अपने क्षेत्र के बल्क वेस्ट जेनरेटर की पहचान कर उनकी सूची पोर्टल पर अपडेट करनी है। ऐसे संस्थानों को जियो-टैग करने और होटल, व्यावसायिक तथा संस्थागत परिसरों की मैपिंग का भी प्रावधान है।
नियम नहीं माने तो कितना जुर्माना लगेगा?
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स-2026 में पूरे देश के लिए हर उल्लंघन पर एक ही निश्चित रुपये का जुर्माना नहीं लिखा गया है।
बिना जरूरी रजिस्ट्रेशन काम करने, गलत जानकारी देने या नियमों का पालन नहीं करने पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाई जा सकती है। इसकी कार्रवाई प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से तय दिशा-निर्देशों के आधार पर की जाएगी।
इसके अलावा स्थानीय निकाय अपने उपनियमों में स्पॉट फाइन तय कर सकते हैं। हिसार प्रशासन की 6 अक्तूबर की बैठक में भी नियमों का उल्लंघन करने वालों की निगरानी और दंडात्मक कार्रवाई के लिए व्यवस्था मजबूत करने पर चर्चा हुई है।
उपायुक्त महेंद्र पाल ने नगर निगम, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जन स्वास्थ्य, बिजली विभाग, पंचायत, नगर योजनाकार, स्वास्थ्य और महिला एवं बाल विकास सहित संबंधित विभागों को नियमों की सख्ती से पालना कराने को कहा है।
शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में मौजूदा कचरा प्रबंधन व्यवस्था, बड़े कचरा उत्पादक संस्थानों का रजिस्ट्रेशन, स्रोत पर कचरे को अलग करने और नियम तोड़ने वालों की निगरानी पर विभागों को मिलकर काम करना होगा।
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स-2026 केंद्र सरकार ने 27 जनवरी 2026 को अधिसूचित किए थे और ये 1 अप्रैल 2026 से लागू हैं। हिसार की नई बैठक अब जिले में इन्हीं नियमों के स्थानीय स्तर पर पालन और निगरानी पर केंद्रित है।










