शुक्रवार, 18 सितम्बर 2026 | 19:25 ISTहमसे जुड़ें:
हरियाणा

हरियाणा में इंतकाल-जमाबंदी के लंबित मामलों को 11 दिन में निपटाने के आदेश, लापरवाही पर होगी कार्यवाही

हरियाणा में इंतकाल-जमाबंदी के लंबित मामलों को समय पर निपटाने के आदेश दिए गए हैं। जानें पटवारी, कानूनगो और CRO की समय सीमा, 11वें दिन ऑटो म्यूटेशन और ऑनलाइन जमाबंदी की व्यवस्था।

हरियाणा इंतकाल जमाबंदी के लंबित मामलों की समीक्षा करते अधिकारी
हरियाणा इंतकाल जमाबंदी के लंबित मामलों की समीक्षा करते अधिकारी

करनाल, 15 सितंबर। हरियाणा में इंतकाल, जमाबंदी और दूसरे लंबित राजस्व मामलों को तय समय में निपटाने पर सख्ती बढ़ाई जा रही है। करनाल में राजस्व विभाग की समीक्षा के दौरान निशानदेही, जमाबंदी, इंतकाल, ततीमा कटिंग, टोकन पेंडेंसी और कोर्ट केसों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। डीसी डॉ. आनंद कुमार शर्मा ने अधिकारियों को साफ कहा कि आम लोगों को अपने काम के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

हरियाणा सरकार ने इससे पहले लंबित इंतकाल के मामलों के लिए अधिकारियों की समय सीमा भी तय कर दी है। पटवारी को मामला पांच दिन में और कानूनगो व सर्कल रेवेन्यू ऑफिसर (CRO) को तीन-तीन दिन में अपने स्तर पर क्लियर करना होगा। सरकार ने यह व्यवस्था पुराने लंबित मामलों को तेजी से कम करने और जिम्मेदारी तय करने के लिए लागू की है।

इंतकाल के लिए पटवारी को 5 दिन, कानूनगो को 3 दिन

राजस्व विभाग की 2 सितंबर की नई व्यवस्था के अनुसार दाखिल-खारिज यानी इंतकाल के मामलों को पटवारी पांच दिन से अधिक अपने स्तर पर लंबित नहीं रख सकेगा। इसके बाद कानूनगो और CRO स्तर पर भी तीन-तीन दिन की समय सीमा तय की गई है। हरियाणा सरकार की इस समय-सीमा संबंधी मूल जानकारी यहां देखी जा सकती है। हरियाणा सरकार का आधिकारिक आदेश/प्रेस रिलीज

करनाल की समीक्षा बैठक में भी इसी तरह लंबित राजस्व कार्यों को समय पर पूरा करने पर जोर दिया गया है। अच्छी रिकवरी करने वाले पटवारियों की सराहना की गई, जबकि कम रिकवरी वाले क्षेत्रों में काम तेज करने को कहा गया।

अधिकारियों ने बैठक में बताया कि पटवारी, कानूनगो और CRO स्तर पर परिवार पहचान पत्र के तहत जाति सत्यापन और करेक्शन का काम करीब 97 से 99 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है।

हरियाणा में पराली जलाना पड़ेगा भारी, रेड एंट्री-FIR के लिए गांव-गांव तैनात हुआ ‘पराली सुरक्षा बल’

करनाल में महिलाओं ने सीखी घर से कम लागत में ढींगरी मशरूम से कमाई की नई तकनीक

नई रजिस्ट्री के बाद इंतकाल के लिए अलग आवेदन की जरूरत नहीं

हरियाणा में नई रजिस्ट्री से जुड़े पात्र मामलों के लिए ऑटो म्यूटेशन व्यवस्था भी लागू की गई है। रजिस्ट्री होते ही इंतकाल की प्रक्रिया अपने आप शुरू हो जाती है और अलग से आवेदन देने की जरूरत नहीं रहती। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने जून में Paperless Registration 2.0 के साथ यह व्यवस्था शुरू की थी। ऑटो म्यूटेशन पर हरियाणा सरकार की मूल जानकारी

मौजूदा व्यवस्था में म्यूटेशन पहले पटवारी के लॉगिन में जाता है। वहां तय अवधि में कार्रवाई नहीं होने पर मामला अपने आप कानूनगो और फिर CRO के पास पहुंचता है। पात्र और निर्विवाद मामले में निर्धारित कार्रवाई न होने पर 11वें दिन इंतकाल जमाबंदी में अपने आप शामिल होने की व्यवस्था की गई है।

हालांकि यह नियम हर पुराने लंबित इंतकाल पर अपने आप लागू नहीं होता। जमीन के मालिकाना हक पर विवाद, रिकॉर्ड में अंतर, आपत्ति या खेवट विभाजन जैसे मामलों में अलग जांच की जरूरत पड़ सकती है।

हरियाणा में इंतकाल कैसे चेक करें?

हरियाणा में जमीन का इंतकाल यानी Mutation रिकॉर्ड ऑनलाइन भी चेक किया जा सकता है। इसके लिए राजस्व विभाग के Jamabandi Haryana Portal पर जमीन से संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध कराया गया है।

यहां sanctioned mutation की जानकारी जमीन मालिक के नाम, खेवट नंबर या खसरा नंबर जैसी जानकारी के आधार पर देखी जा सकती है। हरियाणा सरकार के जिला प्रशासन के आधिकारिक पेज भी इसी पोर्टल के जरिए Registration, Mutation और Jamabandi रिकॉर्ड देखने की सुविधा बताते हैं।

इससे जमीन खरीदने या विरासत के बाद यह पता लगाया जा सकता है कि इंतकाल राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज हुआ है या नहीं। अगर मामला अभी लंबित है तो पटवारी, कानूनगो और CRO स्तर पर तय समय सीमा वाली प्रक्रिया अलग से लागू होती है।

हरियाणा में इंतकाल ऑनलाइन कैसे प्राप्त करें?

इंतकाल की सिर्फ जानकारी देखने के अलावा अब उसकी डिजिटल प्रमाणित कॉपी भी ऑनलाइन प्राप्त की जा सकती है। हरियाणा सरकार ने जुलाई 2026 में Revenue Haryana Portal पर यह सुविधा शुरू की है।

आवेदक को पोर्टल पर मोबाइल नंबर से OTP के जरिए लॉगिन करना होगा। इसके बाद Mutation यानी इंतकाल का विकल्प चुनकर जिला, तहसील और गांव की जानकारी भरनी होगी। आवेदन जमा होने पर एक tracking ID मिलेगी और रिकॉर्ड संबंधित पटवारी या राजस्व अधिकारी के पास verification के लिए जाएगा।

Verification के बाद निर्धारित फीस ऑनलाइन जमा करनी होती है। इंतकाल की प्रमाणित कॉपी के लिए 100 रुपये शुल्क तय किया गया है। भुगतान के बाद digitally certified copy applicant के dashboard से डाउनलोड की जा सकती है।

इसी व्यवस्था के तहत जमाबंदी, फर्द बदर और registered sale deed की प्रमाणित कॉपी भी ऑनलाइन प्राप्त की जा सकती है।

लेखक

Sandeep Kumar

संदीप कुमार LocalHaryana.com के संस्थापक और संपादक हैं। वे वर्ष 2020 से डिजिटल पत्रकारिता और ऑनलाइन समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। वे मुख्य रूप से हरियाणा समाचार, सरकारी योजनाएं, नौकरियां, शिक्षा, खेतीबाड़ी और मौसम से जुड़े विषयों पर लेखन और संपादन करते हैं। उनका प्रयास पाठकों तक तथ्य आधारित, स्पष्ट और उपयोगी जानकारी सरल हिंदी में पहुँचाना है। LocalHaryana.com पर प्रकाशित सामग्री उपलब्ध आधिकारिक सूचनाओं और विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर तैयार की जाती है।

और पढ़ें

सभी देखें