हरियाणा में बकाया बिजली बिल वालों पर सख्ती, कनेक्शन काटने के निर्देश
लोकल हरियाणा, अंबाला। हरियाणा में लंबे समय से बिजली बिल नहीं भरने वाले उपभोक्ताओं पर कार्रवाई तेज हो सकती है। ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने गुरुवार, 17 सितंबर को अंबाला छावनी के लोक निर्माण विभाग विश्राम गृह में जनसुनवाई के…

- ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने पूरे हरियाणा में पुराने बकाया बिजली बिलों पर रिकवरी कार्रवाई करने को कहा है।
- HERC नियमों में बकाया बिल पर कम से कम 15 दिन का लिखित नोटिस देकर कनेक्शन काटने का प्रावधान है।
- बिल की रकम को लेकर विवाद होने पर तय रकम विरोध के साथ जमा करने पर मामले के निपटारे तक सप्लाई काटने से राहत का प्रावधान है।
लोकल हरियाणा, अंबाला। हरियाणा में लंबे समय से बिजली बिल नहीं भरने वाले उपभोक्ताओं पर कार्रवाई तेज हो सकती है। ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने गुरुवार, 17 सितंबर को अंबाला छावनी के लोक निर्माण विभाग विश्राम गृह में जनसुनवाई के दौरान बिजली अधिकारियों से कहा कि तय बिलिंग साइकिल से ज्यादा बकाया वाले मामलों में रिकवरी अभियान चलाकर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
जनसुनवाई में एक ऐसा मामला सामने आया, जिसमें उपभोक्ता पर करीब एक लाख रुपये का बिजली बिल बकाया था और उसने भुगतान के लिए और समय मांगा था। इस पर विज ने कहा कि बिजली का इस्तेमाल किया है तो बिल का भुगतान भी करना होगा। उन्होंने लाखों रुपये का बिल बकाया होने के बाद भी बिजली सप्लाई जारी रहने पर सवाल उठाते हुए पूरे हरियाणा में ऐसे मामलों पर कार्रवाई करने को कहा।
बिजली बिल नहीं भरा तो कब काटा जा सकता है कनेक्शन?
बकाया बिल पर कार्रवाई को लेकर सबसे जरूरी बात यह है कि हरियाणा में कनेक्शन काटने की व्यवस्था पहले से नियमों में है। हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग के इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कोड, 2014 के मुताबिक अगर उपभोक्ता बिल में दी गई आखिरी तारीख तक बिजली शुल्क या दूसरी देय राशि जमा नहीं करता है तो बिजली वितरण कंपनी कम से कम 15 दिन का लिखित नोटिस देकर सप्लाई काट सकती है।
नियम में यह भी व्यवस्था है कि पहली बिलिंग साइकिल का बिल जमा नहीं होने के बावजूद कनेक्शन चालू रहता है तो अगली बिलिंग साइकिल के बिल में पिछला बकाया भी दिखाया जाएगा। साथ ही चेतावनी दी जाएगी कि तय तारीख तक भुगतान नहीं हुआ तो बिना किसी नए नोटिस के सप्लाई काटी जा सकती है।
हरियाणा में बिजली कर्मचारियों के प्रमोशन प्रक्रिया शुरू, मांगा बायोडाटा
दूसरी बिलिंग साइकिल की आखिरी तारीख गुजरने के बाद संबंधित अधिकारी को कनेक्शन काटने की कार्रवाई करनी होती है। नियम वितरण कंपनी को बकाया होने पर इससे पहले कार्रवाई करने से भी नहीं रोकता।
इसका मतलब यह है कि कार्रवाई केवल इस आधार पर तय नहीं होती कि बिल “दो महीने पुराना” है। बिल की ड्यू डेट, दिया गया नोटिस और संबंधित बिलिंग साइकिल भी देखी जाती है।
बिल की रकम गलत है या विवाद चल रहा है तो क्या होगा?
अगर उपभोक्ता का कहना है कि बिजली बिल गलत है और उसने बिल को लेकर विभाग के सामने विवाद दर्ज कराया है तो ऐसे मामले के लिए भी सप्लाई कोड में व्यवस्था है।
नियम के मुताबिक विवाद लंबित रहने के दौरान उपभोक्ता विरोध दर्ज कराते हुए विभाग की मांगी गई रकम या पिछले छह महीनों में जमा किए गए बिजली शुल्क के मासिक औसत के बराबर रकम में से जो कम हो, उसे जमा कर सकता है। ऐसा करने पर विवाद का फैसला होने तक बिजली सप्लाई नहीं काटी जानी चाहिए।
इसलिए बिल में गलत रीडिंग, गलत रकम या किसी दूसरी गड़बड़ी का मामला हो तो बिल को बिना कार्रवाई के लंबे समय तक छोड़ने के बजाय बिजली निगम के पास शिकायत दर्ज कराना और नियम के अनुसार जरूरी रकम जमा करना महत्वपूर्ण है।
ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने भी 17 सितंबर की जनसुनवाई के बाद कहा कि बकाया बिल वाले मामलों में जो नियम लागू हैं, उन्हीं के अनुसार कार्रवाई की जाए। उन्होंने अधिकारियों से प्रदेश में तय बिलिंग साइकिल से ज्यादा पुराने बकाया मामलों की पहचान कर रिकवरी अभियान चलाने को कहा है।








