85 साल की उम्र में सिरसा के लालचंद गोदारा ने की MA, सहन नहीं हुआ अपढता का ताना
लोकल हरियाणा, सिरसा। पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती, इसे सिरसा के 85 वर्षीय पूर्व सैनिक लालचंद गोदारा ने एक बार फिर साबित कर दिया है। करीब 80 साल की उम्र में ग्रेजुएशन करने वाले लालचंद ने अब एमए की डिग्री भी हासिल कर ली है…

- 85 साल की उम्र में पूरी की एमए
- 2022 में इग्नू से किया था बीए
- अब पीएचडी या लॉ करने का सपना
लोकल हरियाणा, सिरसा। पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती, इसे सिरसा के 85 वर्षीय पूर्व सैनिक लालचंद गोदारा ने एक बार फिर साबित कर दिया है। करीब 80 साल की उम्र में ग्रेजुएशन करने वाले लालचंद ने अब एमए की डिग्री भी हासिल कर ली है।
लालचंद के मुताबिक पढ़ाई की अहमियत उन्हें उम्र के आखिरी पड़ाव में उस समय ज्यादा महसूस हुई, जब पोते-पोतियां उनके कम पढ़े-लिखे होने पर ताना मारते थे। उन्होंने बताया कि यह बात उन्हें इतनी चुभी कि उन्होंने दोबारा पढ़ाई शुरू करने की ठान ली।
वर्ष 2022 में इग्नू से बीए पूरा करने के बाद भी उन्होंने पढ़ाई नहीं छोड़ी और अब एमए कर ली है। उनका अगला सपना पीएचडी या लॉ की पढ़ाई करना है। 2022 में बीए पास करने के समय भी लालचंद ने आगे मास्टर डिग्री करने की इच्छा जताई थी।

ताना लगा तो दोबारा शुरू कर दी पढ़ाई
लालचंद गोदारा बताते हैं कि उन्हें शिक्षा की अहमियत समझ आई तब उनकी उम्र करीब 76 साल हो चुकी थी। परिवार में पोते-पोतियों की ओर से कम पढ़े-लिखे होने की बात सुनने के बाद उन्होंने इसे बदलने की ठान ली।
इसके बाद उन्होंने अपनी पढ़ाई आगे बढ़ाई। पुरानी प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक लालचंद ने पहले बीपीपी ब्रिज कोर्स किया और इसके बाद इग्नू से बीए की पढ़ाई पूरी की। अक्टूबर 2022 में करीब 80 साल की उम्र में उन्हें ग्रेजुएशन की डिग्री मिली थी। उस समय उन्होंने आगे मास्टर डिग्री और फिर पीएचडी तक पढ़ने की इच्छा जताई थी।
चार साल बाद अब उन्होंने मास्टर डिग्री हासिल कर अपना अगला लक्ष्य भी पूरा कर लिया है। लालचंद का कहना है कि उनका पढ़ाई का सफर अभी खत्म नहीं हुआ है और अब वे पीएचडी या लॉ की पढ़ाई करने की इच्छा रखते हैं।
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पढ़ाई के साथ खेलों में भी लगातार जीत रहे पदक
लालचंद गोदारा की पहचान केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं है। बढ़ती उम्र के बावजूद वे मास्टर एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं में लगातार हिस्सा लेते रहे हैं।
दैनिक भास्कर की एक पुरानी रिपोर्ट के मुताबिक 83 वर्ष की उम्र में उन्होंने हरियाणा मास्टर एथलेटिक्स चैंपियनशिप के 80 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में शॉटपुट, डिस्कस थ्रो और 100 मीटर दौड़ में तीन स्वर्ण पदक जीते थे। उस समय उनके नाम जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में 100 से अधिक पदक दर्ज होने की बात सामने आई थी।
इससे पहले 2022 की हरियाणा मास्टर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी उन्होंने शॉटपुट में स्वर्ण और हैमर थ्रो व डिस्कस थ्रो में रजत पदक जीते थे।
लालचंद के मुताबिक अब उनके पदकों की संख्या 200 के आसपास पहुंच चुकी है, जिनमें करीब 150 स्वर्ण पदक शामिल हैं। वे बताते हैं कि शरीर को सक्रिय रखने के लिए नियमित अभ्यास करते हैं और आज भी रोजाना लंबी दूरी तक दौड़ लगाते हैं।

सेना से रोडवेज तक दी सेवाएं, रिटायरमेंट के बाद चुना मैदान और पढ़ाई
लालचंद गोदारा ने युवावस्था में भारतीय सेना में सेवाएं दीं। पुराने प्रकाशित रिकॉर्ड में उनके 1962 और 1965 की लड़ाइयों के दौरान सेना में सेवा देने का जिक्र मिलता है। लालचंद के मुताबिक उन्होंने 1971 के युद्ध के समय भी सैनिक के रूप में सेवाएं दीं।
सेना के बाद उन्होंने हरियाणा रोडवेज में भी नौकरी की। रिटायरमेंट के बाद जिस उम्र में आम तौर पर लोग आराम को प्राथमिकता देते हैं, लालचंद ने खेल और पढ़ाई दोनों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया।
वे पौधारोपण, शिक्षा, नशा मुक्ति, सफाई और दूसरे सामाजिक अभियानों में भी सक्रिय रहे हैं। उनकी खेल और सामाजिक उपलब्धियों को देखते हुए हरियाणा सरकार उन्हें लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित कर चुकी है।
अब 85 साल की उम्र में एमए पूरा करने के बाद लालचंद का अगला लक्ष्य फिर किताबों से ही जुड़ा है। उनका कहना है कि मौका मिला तो वे पीएचडी या लॉ की पढ़ाई कर अपनी शिक्षा आगे जारी रखेंगे।








