हरियाणा में बाजरे का 2,900 रुपये मिलेगा रेट, जानें MSP और किन किसान को कैसे मिलेगा पूरा भाव
चंडीगढ़। हरियाणा में किसानों को खरीफ मार्केटिंग सीजन 2026-27 के दौरान बाजरे का पूरा 2,900 रुपये प्रति क्विंटल भाव देने की तैयारी है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शुक्रवार, 25 सितंबर को बाजरा और धान खरीद की समीक्षा बैठक…

- बाजरे का MSP 2,900 रुपये प्रति क्विंटल तय
- सरकार 2,300 रुपये प्रति क्विंटल की दर से करेगी खरीद
- बाकी अंतर भावांतर भरपाई योजना से मिलेगा
चंडीगढ़। हरियाणा में किसानों को खरीफ मार्केटिंग सीजन 2026-27 के दौरान बाजरे का पूरा 2,900 रुपये प्रति क्विंटल भाव देने की तैयारी है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शुक्रवार, 25 सितंबर को बाजरा और धान खरीद की समीक्षा बैठक में कहा कि इस बार सरकार 2,300 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बाजरा खरीदेगी और न्यूनतम समर्थन मूल्य तक का बाकी अंतर भावांतर भरपाई योजना से पूरा किया जाएगा।
खुले बाजार में 2,300 रुपये से अधिक भाव मिलने पर किसान के बिक्री भाव और 2,900 रुपये के बीच का अंतर सरकार देगी। बाजरा खरीद और भावांतर का लाभ मेरी फसल-मेरा ब्यौरा में दर्ज रिकॉर्ड और जारी जे-फार्म के आधार पर मिलेगा।
केंद्र सरकार ने मई में खरीफ सीजन 2026-27 के लिए बाजरे का MSP 2,900 रुपये प्रति क्विंटल तय किया था। पिछले सीजन में यह 2,775 रुपये था। यानी इस बार MSP में 125 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है।
2,300 रुपये खरीद भाव के बाद कैसे मिलेंगे पूरे 2,900 रुपये?
हरियाणा सरकार की ताजा व्यवस्था में 2,900 रुपये को सीधे सरकारी खरीद रेट नहीं रखा गया है। सरकार ने बाजरे की खरीद के लिए 2,300 रुपये प्रति क्विंटल की दर तय की है और MSP तक की कमी भावांतर भरपाई योजना से पूरी की जाएगी।
अगर किसान का बाजरा 2,300 रुपये प्रति क्विंटल पर खरीदा जाता है तो 2,900 रुपये MSP तक पहुंचने के लिए 600 रुपये प्रति क्विंटल का अंतर बनता है।
वहीं खुले बाजार में किसान को 2,300 रुपये से ज्यादा भाव मिलता है तो सरकार बिक्री भाव और 2,900 रुपये के बीच का अंतर देगी। उदाहरण के लिए बाजार में 2,500 रुपये प्रति क्विंटल भाव मिलने पर MSP तक 400 रुपये प्रति क्विंटल का अंतर बचेगा।
25 सितंबर की समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने बताया कि उस समय खुले बाजार में बाजरा औसतन करीब 2,235 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा था। इसी के बाद मुख्यमंत्री ने किसानों को 2,900 रुपये प्रति क्विंटल का भाव सुनिश्चित करने की बात कही।
पिछले साल भी बाजरे के मामले में इसी तरह की व्यवस्था अपनाई गई थी। सरकार ने पहले 2,150 रुपये और बाद में 2,200 रुपये प्रति क्विंटल खरीद दर तय की थी और खरीद भाव तथा MSP के बीच के अंतर की भरपाई अलग से की गई थी।
बाजरे का भावांतर लेने के लिए मेरी फसल-मेरा ब्यौरा और J-Form जरूरी है?
सरकार ने इस बार साफ किया है कि बाजरा खरीद और भावांतर भरपाई का काम मेरी फसल-मेरा ब्यौरा में दर्ज रिकॉर्ड और जारी जे-फार्म के आधार पर किया जाएगा। अधिकारियों को किसानों के दर्ज रकबे का एरिया वेरिफिकेशन भी प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसका मतलब है कि बाजरे की फसल और रकबे का रिकॉर्ड पोर्टल पर सही होना जरूरी है। मंडी में फसल बिक्री के बाद जारी होने वाला जे-फार्म भी भावांतर भुगतान के रिकॉर्ड का आधार बनेगा।
सरकार ने पड़ोसी राज्यों से सस्ता बाजरा हरियाणा लाकर बेचने पर भी रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। जिला प्रशासन और पुलिस को सीमावर्ती इलाकों में निगरानी रखने को कहा गया है, ताकि योजना का लाभ हरियाणा के दर्ज किसानों को ही मिले।
क्या सरकार बाजरा सीधे 2,900 रुपये प्रति क्विंटल में खरीदेगी?
नहीं। सरकार की 25 सितंबर की ताजा व्यवस्था के मुताबिक सरकारी खरीद दर 2,300 रुपये प्रति क्विंटल रखी गई है। किसान को 2,900 रुपये MSP तक पहुंचाने के लिए बाकी अंतर भावांतर भरपाई योजना से दिया जाएगा।
यही इस बार बाजरे की खरीद में सबसे जरूरी बात है। 2,900 रुपये केंद्र सरकार द्वारा तय MSP है, जबकि हरियाणा में इसका भुगतान खरीद भाव और भावांतर को मिलाकर पूरा किया जाएगा।
हरियाणा में बाजरे की सरकारी खरीद कब शुरू होगी?
यह सवाल मंडियों में आवक शुरू होने के बाद किसानों के बीच लगातार सामने आया है। सितंबर के तीसरे सप्ताह तक रेवाड़ी, नारनौल और दूसरे बाजरा उत्पादक इलाकों में किसान खरीद शुरू होने का इंतजार कर रहे थे और कई जगह फसल MSP से नीचे बिक रही थी।
हरियाणा में खरीफ खरीद की तैयारियों को लेकर जिला स्तर पर जारी निर्देशों में 1 अक्टूबर से खरीद प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी बताई गई है। दूसरी ओर 25 सितंबर की राज्यस्तरीय समीक्षा बैठक में सरकार ने मंडियों में बाजरा खरीद की व्यवस्था, जरूरत के अनुसार अतिरिक्त खरीद केंद्र, कैमरे और जियो-फेंसिंग का काम पूरा करने के निर्देश दिए।
बाजरा लेकर मंडी जाने वाले किसानों के रिकॉर्ड और पहचान की जांच भी होगी। भिवानी में जारी व्यवस्था के मुताबिक वाहन की जियो टैगिंग, फोटो और किसान के बायोमेट्रिक के बाद गेट पास जारी करने की तैयारी की गई है। इसलिए किसान के मेरी फसल-मेरा ब्यौरा रिकॉर्ड और मंडी में जारी दस्तावेज खरीद प्रक्रिया में अहम रहेंगे।








