हरियाणा में ग्राम सभा का बदला नियम, अब 20% सदस्यों में होगी बैठक; विधानसभा में बिल पास

लोकल हरियाणा, चंडीगढ़। हरियाणा के गांवों में सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों के चयन और ग्राम पंचायत विकास योजना से जुड़े फैसले अब कोरम पूरा न होने के कारण बार-बार नहीं अटकेंगे। हरियाणा विधानसभा ने हरियाणा पंचायती राज (संशोधन) बिल-2026 पास कर दिया है। नए प्रावधान के अनुसार ऐसे मामलों के लिए बुलाई जाने वाली ग्राम सभा की मुख्य बैठक में अब कुल सदस्यों की 20 प्रतिशत उपस्थिति कोरम पूरा करने के लिए पर्याप्त होगी। पहले इसके लिए 40 प्रतिशत सदस्यों की मौजूदगी जरूरी थी।

सरकार का कहना है कि ज्यादा कोरम की शर्त पूरी नहीं होने से ग्राम सभाओं की बैठकें बार-बार स्थगित हो रही थीं। इससे सरकारी योजनाओं के पात्र लोगों की मंजूरी और ग्राम पंचायत विकास योजना से जुड़े काम समय पर आगे नहीं बढ़ पा रहे थे। इसी परेशानी को देखते हुए कोरम की शर्त आसान की गई है।

ग्राम सभा की बैठक में अब कितने लोगों का होना जरूरी?

नए बदलाव के तहत सरकारी योजनाओं के लिए पात्र लाभार्थियों पर विचार और मंजूरी देने तथा ग्राम पंचायत विकास योजना तैयार करने वाली मुख्य बैठक में ग्राम सभा के कुल सदस्यों में से 20 प्रतिशत की मौजूदगी पर्याप्त होगी।

अगर पहली बैठक में इतना कोरम भी पूरा नहीं होता और बैठक स्थगित करनी पड़ती है तो अगली यानी पहली स्थगित बैठक में 15 प्रतिशत सदस्य मौजूद होने पर बैठक की कार्रवाई की जा सकेगी।

सरकारी जानकारी के अनुसार दूसरी स्थगित बैठक के लिए निर्धारित संख्या के सदस्यों की मौजूदगी को कोरम माना जाएगा।

बैठकपहले कोरमनया कोरम
मुख्य बैठक40%20%
पहली स्थगित बैठक30%15%
दूसरी स्थगित बैठक20%निर्धारित संख्या

क्या हर ग्राम सभा की बैठक में अब 20% सदस्य ही जरूरी होंगे?

20 प्रतिशत वाला नया नियम खास तौर पर सरकारी योजनाओं के पात्र लाभार्थियों की मंजूरी और ग्राम पंचायत विकास योजना तैयार करने से जुड़ी बैठकों के लिए है।

हरियाणा पंचायती राज कानून में सामान्य ग्राम सभा की बैठक के लिए पहले से अलग व्यवस्था है। सामान्य बैठक में ग्राम सभा के कुल सदस्यों का एक-दसवां हिस्सा या 300 सदस्य, इनमें से जो भी कम हो, उसे कोरम माना जाता है। यह व्यवस्था धारा 11 में पहले से मौजूद है।

इसलिए नए बिल का मतलब यह नहीं है कि हर तरह की ग्राम सभा बैठक के लिए एक ही 20 प्रतिशत का नियम लागू हो गया है।

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पहले 40 प्रतिशत सदस्य क्यों जरूरी थे?

सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों के चयन और ग्राम पंचायत विकास योजना जैसे महत्वपूर्ण मामलों में ज्यादा लोगों की भागीदारी और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पहले सामान्य ग्राम सभा से ज्यादा कोरम रखा गया था।

पिछली व्यवस्था में मुख्य बैठक में 40 प्रतिशत, पहली स्थगित बैठक में 30 प्रतिशत और दूसरी स्थगित बैठक में 20 प्रतिशत सदस्यों की मौजूदगी जरूरी थी। यह व्यवस्था 2025 में किए गए पंचायती राज बदलावों से जुड़ी थी।

सरकार के मुताबिक व्यवहार में इतने सदस्यों को एक साथ बैठक में जुटाना मुश्किल हो रहा था। बैठक पूरी नहीं होने पर योजना से जुड़े फैसले भी आगे नहीं बढ़ पाते थे।

सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को क्या फायदा होगा?

इस बदलाव का सीधा असर उन मामलों पर पड़ सकता है जिनमें ग्राम सभा की मंजूरी के बाद पात्र लाभार्थी आगे बढ़ते हैं।

अगर किसी सरकारी योजना में पात्र परिवारों की सूची ग्राम सभा के सामने रखी जाती है और केवल कोरम पूरा नहीं होने की वजह से बैठक स्थगित हो जाती है तो लाभार्थियों की मंजूरी भी रुक सकती है।

अब मुख्य बैठक के लिए 20 प्रतिशत उपस्थिति होने से ऐसी बैठकों के पूरा होने की संभावना बढ़ेगी। इससे योजना के लाभार्थियों के चयन और मंजूरी की प्रक्रिया में होने वाली देरी कम करने में मदद मिल सकती है। सरकार ने भी बिल का उद्देश्य योजनाओं को समय पर लागू करने से जोड़ा है।

ग्राम पंचायत विकास योजना के काम भी हो सकेंगे जल्दी

हर साल गांव में सड़क, पानी, सफाई, गलियों, सार्वजनिक सुविधाओं और दूसरे विकास कार्यों को लेकर ग्राम पंचायत विकास योजना तैयार की जाती है।

इससे जुड़े प्रस्तावों पर ग्राम सभा में विचार किया जाता है। अगर कोरम पूरा न हो तो योजना बनाने और आगे भेजने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

नए नियम में इसी तरह की बैठक के लिए भी मुख्य कोरम 40 से घटाकर 20 प्रतिशत किया गया है। सरकार का कहना है कि इससे ग्राम सभाएं समय पर अपने तय काम कर सकेंगी, जबकि भागीदारी और पारदर्शिता भी बनी रहेगी।

विधानसभा के आखिरी दिन पास हुआ बिल

हरियाणा पंचायती राज (संशोधन) बिल-2026 को पहले मानसून सत्र में विधानसभा के सामने रखा गया था। विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड में इसे बिल नंबर-20 ऑफ 2026 के रूप में दर्ज किया गया है।

1 सितंबर को मानसून सत्र के अंतिम दिन चर्चा के बाद इसे पास किया गया। इसी दिन विधानसभा ने कुल 11 बिल पास किए, जिनमें अल्पसंख्यक आयोग, महिला आयोग, जीएसटी, स्थानीय लेखा-परीक्षा और कारोबार का अधिकार बिल भी शामिल हैं।

विधानसभा से बिल पास होने के बाद आगे की संवैधानिक और अधिसूचना संबंधी प्रक्रिया पूरी होगी। इसके बाद संशोधित नियम के लागू होने की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।

Sandeep Kumar

संदीप कुमार LocalHaryana.com के संस्थापक और संपादक हैं। वे वर्ष 2020 से डिजिटल पत्रकारिता और ऑनलाइन समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। वे मुख्य रूप से हरियाणा समाचार, सरकारी योजनाएं, नौकरियां, शिक्षा, खेतीबाड़ी और मौसम से जुड़े विषयों पर लेखन और संपादन करते हैं। उनका प्रयास पाठकों तक तथ्य आधारित, स्पष्ट और उपयोगी जानकारी सरल हिंदी में पहुँचाना है। LocalHaryana.com पर प्रकाशित सामग्री उपलब्ध आधिकारिक सूचनाओं और विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर तैयार की जाती है।

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