हरियाणा में 4 बड़े कचरा प्लांट को मंजूरी, हिसार-अंबाला समेत इन शहरों का 5000 टन कचरे से बनेगी 50 MW बिजली
हरियाणा में हिसार, अंबाला, फरीदाबाद और गुरुग्राम क्लस्टर में 4 Waste-to-Energy Plant लगेंगे। रोज 5000 टन कचरे से 50 MW ऊर्जा बनेगी।
चंडीगढ़, 29 अगस्त। हरियाणा के शहरों में रोज निकलने वाले हजारों टन कचरे के निपटारे के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने हिसार, अंबाला, फरीदाबाद और गुरुग्राम क्लस्टर में चार इंटीग्रेटेड वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट स्थापित करने के लिए समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं। चारों प्लांट शुरू होने के बाद इनमें हर दिन कुल 5,000 टन कचरे का प्रसंस्करण कर करीब 50 मेगावाट ऊर्जा तैयार करने का लक्ष्य है।
नूंह में 29 अगस्त को हुए कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की मौजूदगी में ये समझौते किए गए। सरकार के अनुसार चारों प्लांट अक्टूबर 2028 तक चालू किए जाने की उम्मीद है। इन परियोजनाओं को OIL Green Energy Limited स्थापित करेगी, जो सरकारी कंपनी Oil India Limited की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है।
हिसार क्लस्टर से जुड़ेंगे हिसार, हांसी, फतेहाबाद और जींद
पहला प्लांट हिसार क्लस्टर में लगाया जाएगा। इसके दायरे में हिसार, हांसी, फतेहाबाद और जींद क्षेत्र के शहरी स्थानीय निकाय शामिल होंगे।
इस प्लांट में प्रतिदिन करीब 500 टन कचरे का प्रसंस्करण करने की क्षमता होगी। इससे न्यूनतम 5 मेगावाट ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।
यानी इन क्षेत्रों से निकलने वाले कचरे को केवल डंप करने के बजाय उसे अलग-अलग प्रक्रिया से गुजारकर उपयोगी ऊर्जा और दूसरे संसाधनों में बदलने की योजना है।
अंबाला क्लस्टर में रोज 900 टन कचरे का होगा निपटारा
दूसरा वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट अंबाला क्लस्टर में बनेगा। इसमें अंबाला, यमुनानगर और पंचकूला जिलों के शहरी स्थानीय निकाय शामिल होंगे।
यहां रोज लगभग 900 टन कचरे का प्रसंस्करण किया जा सकेगा और इससे न्यूनतम 9 मेगावाट ऊर्जा उत्पादन की उम्मीद है।
इस तरह हिसार और अंबाला क्लस्टर के जरिए प्रदेश के कई शहरों और शहरी निकायों को एक साथ नई कचरा प्रबंधन व्यवस्था से जोड़ा जाएगा।
फरीदाबाद में 1600 और गुरुग्राम में 2000 टन क्षमता
चारों प्रस्तावित प्लांट में सबसे ज्यादा क्षमता गुरुग्राम की होगी।
फरीदाबाद क्लस्टर में रोज करीब 1,600 टन कचरे का प्रसंस्करण किया जाएगा। इस प्लांट से न्यूनतम 16 मेगावाट ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य है।
गुरुग्राम में रोज 2,000 टन कचरे के प्रसंस्करण की क्षमता वाला प्लांट बनाया जाएगा। इससे कम से कम 20 मेगावाट ऊर्जा तैयार होने की उम्मीद है।
इस हिसाब से चारों प्लांट की कुल क्षमता 5,000 टन प्रतिदिन और ऊर्जा उत्पादन क्षमता करीब 50 मेगावाट होगी।
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गीले और सूखे कचरे के लिए अलग व्यवस्था
सरकार का दावा है कि प्रस्तावित संयंत्र केवल कचरा जलाने तक सीमित नहीं होंगे। कचरे को पहले अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर उसका प्रसंस्करण किया जाएगा।
गीले कचरे से बायोगैस तैयार करने के लिए Compressed Biogas व्यवस्था प्रस्तावित है। वहीं ऐसा सूखा कचरा, जिसे दोबारा इस्तेमाल या रिसाइकल नहीं किया जा सकता, उसे वेस्ट-टू-एनर्जी प्रक्रिया में इस्तेमाल किया जाएगा।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि उद्देश्य कचरा जलाने की मात्रा को कम रखते हुए वैज्ञानिक तरीके से उसका निपटारा करना है। सरकार ने परियोजनाओं में पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित करने की बात भी कही है।
परियोजना की लागत में केंद्र, राज्य और कंपनी की हिस्सेदारी
सरकार के मुताबिक इन परियोजनाओं को केंद्र सरकार के Urban Challenge Fund के तहत आर्थिक सहायता मिलेगी।
कुल पूंजीगत लागत का 25 प्रतिशत केंद्र सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। अन्य 25 प्रतिशत राशि हरियाणा सरकार और संबंधित शहरी स्थानीय निकाय मिलकर देंगे, जबकि बाकी 50 प्रतिशत निवेश OIL Green Energy Limited करेगी।
हालांकि सरकार की ओर से अभी चारों परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत अलग से सार्वजनिक नहीं की गई है।
गुरुग्राम में पहले भी अटक चुकी है वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजना
नई घोषणा गुरुग्राम के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि Bandhwari में वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजना पहले भी लंबे समय तक देरी का सामना कर चुकी है।
2017 में गुरुग्राम और फरीदाबाद के कचरे के प्रबंधन के लिए Ecogreen Energy के साथ समझौता हुआ था। बाद में Bandhwari में वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट पर काम शुरू करने की योजना बनी, लेकिन परियोजना तय समय के अनुसार चालू नहीं हो सकी।
इस बार सरकार ने चारों नए प्लांट के लिए अक्टूबर 2028 तक संचालन शुरू करने का लक्ष्य बताया है। अब आगे जमीन, जरूरी मंजूरियां, निर्माण और मशीनरी स्थापित करने की प्रगति तय करेगी कि परियोजनाएं इस समयसीमा के भीतर शुरू हो पाती हैं या नहीं।
इन प्लांट के शुरू होने पर सरकार के सामने सबसे अहम चुनौती केवल कचरे को प्लांट तक पहुंचाना नहीं होगी, बल्कि घरों और संस्थानों के स्तर पर गीले और सूखे कचरे को अलग कराना भी होगा। सरकार ने इसके लिए लोगों की भागीदारी को जरूरी बताया है।








