लोकल हरियाणा, अंबाला। हरियाणा, पंजाब, हिमाचल, चंडीगढ़ और जम्मू-कश्मीर की तरफ जाने वाले लाखों रेल यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। उत्तर रेलवे ने दिल्ली-पानीपत-अंबाला के 197 किलोमीटर लंबे व्यस्त रेलमार्ग को फोर-लेन (तीसरी और चौथी पटरी) करने की तैयारी तेज कर दी है। इसके लिए सोनीपत जिला प्रशासन को जमीन अधिग्रहण का प्रस्ताव भेज दिया गया है, जिससे ट्रेनों की लेट-लतीफी और छोटे स्टेशनों पर रुकने का झंझट हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।
Highlights (एक नज़र में):
- बजट और समय: इस पूरे प्रोजेक्ट पर 5983 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसे अगले 4 साल में पूरा करने का लक्ष्य है।
- सोनीपत में जमीन अधिग्रहण: राई तहसील के 5, सोनीपत के 10 और गन्नौर के 6 गांवों की जमीन अधिग्रहित की जाएगी।
- बड़ा फायदा: सुपरफास्ट ट्रेनों को पास देने के लिए पैसेंजर गाड़ियों को लूप लाइन में रोकने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे दैनिक यात्रियों का समय बचेगा।
जिला राजस्व अधिकारी (DRO) सुशील शर्मा ने बताया कि रेलवे की तरफ से जमीन अधिग्रहण का प्रस्ताव मिल गया है। राई, सोनीपत और गन्नौर तहसीलों से जमीन का रिकॉर्ड मांगा गया है। रिकॉर्ड की जांच के तुरंत बाद आगे की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। रेलवे ने कई जगह जमीन पर निशान भी लगाने शुरू कर दिए हैं।
40% बढ़ी यात्रियों की संख्या, अब 4 लाइनें संभालेंगी ट्रैफिक
वर्तमान में दिल्ली-अंबाला रेलमार्ग पर आने-जाने (Up/Down) की सिर्फ दो ही पटरियां हैं। इस रूट पर रोजाना करीब 200 मेल, एक्सप्रेस, पैसेंजर और मालगाड़ियां दौड़ती हैं। पिछले एक दशक में इस रूट पर यात्रियों की संख्या में लगभग 40% की बढ़ोतरी हुई है। सिर्फ दो लाइनें होने के कारण अक्सर एक्सप्रेस ट्रेनों को निकालने के लिए पैसेंजर या धीमी रफ्तार वाली ट्रेनों को छोटे स्टेशनों पर काफी देर तक रोके रखना पड़ता है, जिससे गाड़ियां घंटों लेट हो जाती हैं।
पहले चरण के लिए 3612 करोड़ रुपये का टेंडर जारी
इस 5983 करोड़ रुपये के मेगा प्रोजेक्ट को रेलवे ने 4 साल में पूरा करने का टारगेट रखा है। पहले चरण में सब्जी मंडी (दिल्ली) से अंबाला कैंट के बीच दो नई पटरियां बिछाने के लिए 3612 करोड़ रुपये का टेंडर (निविदा) निकाल दिया गया है। इसमें सिविल ट्रैक, सिग्नलिंग, ओएचई (OHE) और टेलीकम्युनिकेशन का पूरा काम शामिल है। इस टेंडर के लिए बोली जमा करने की अंतिम तारीख 1 फरवरी तय की गई है।










