चंडीगढ़। हरियाणा के गुरुग्राम, पानीपत और अंबाला से बिहार के पटना, गया, पूर्णिया और मधुबनी तक बसों के संचालन के लिए 12 अंतरराज्यीय मार्ग निर्धारित किए गए हैं। दोनों राज्यों के बीच हुए परिवहन समझौते में इन मार्गों की दूरी और रास्ते तय किए गए हैं। इनमें अंबाला से पूर्णिया तक का सफर सबसे लंबा 1,470 किलोमीटर होगा, जबकि गुरुग्राम से पटना की दूरी 1,044 किलोमीटर रखी गई है।
बिहार और हरियाणा के बीच परिवहन समझौते पर 10 जुलाई 2026 को हस्ताक्षर किए गए थे। इसके बाद बिहार सरकार ने 23 जुलाई को राजपत्र में समझौते और मार्गों का विवरण प्रकाशित किया। हालांकि, रूट निर्धारित होने का मतलब यह नहीं है कि बस सेवाएं शुरू हो गई हैं। बसों के चलने का समय, रोजाना फेरे और संचालन से जुड़ी व्यवस्था संबंधित परिवहन प्राधिकरण तय करेंगे।
पटना, गया, पूर्णिया और मधुबनी के लिए 12 मार्ग
समझौते में हरियाणा के तीन शहरों को बिहार के चार प्रमुख शहरों से जोड़ने की व्यवस्था की गई है। प्रत्येक गंतव्य के लिए गुरुग्राम, पानीपत और अंबाला से एक-एक मार्ग शामिल है।
| बिहार का शहर | हरियाणा का शुरुआती शहर | दूरी |
|---|---|---|
| पटना | गुरुग्राम | 1,044 किमी |
| पटना | पानीपत | 1,069 किमी |
| पटना | अंबाला | 1,274 किमी |
| पूर्णिया | गुरुग्राम | 1,267 किमी |
| पूर्णिया | पानीपत | 1,361 किमी |
| पूर्णिया | अंबाला | 1,470 किमी |
| गया | गुरुग्राम | 1,081 किमी |
| गया | पानीपत | 1,099 किमी |
| गया | अंबाला | 1,224 किमी |
| मधुबनी | गुरुग्राम | 1,183 किमी |
| मधुबनी | पानीपत | 1,264 किमी |
| मधुबनी | अंबाला | 1,378 किमी |
इस सूची में अंबाला से पूर्णिया तक का मार्ग सबसे लंबा है। वहीं, गुरुग्राम से पटना का मार्ग इन प्रस्तावित सेवाओं में सबसे छोटा है।
इन शहरों से होकर गुजरेंगे बसों के मार्ग
गुरुग्राम से पटना जाने वाली बस का प्रस्तावित रास्ता सोहना, पलवल, अलीगढ़, लखनऊ, आजमगढ़, बक्सर और आरा से होकर जाएगा। इस मार्ग की कुल दूरी 1,044 किलोमीटर है।
पानीपत से पटना जाने वाले मार्ग की दूरी 1,069 किलोमीटर है। इसमें दिल्ली, नोएडा, आजमगढ़, बक्सर और आरा जैसे प्रमुख पड़ाव शामिल हैं। अंबाला से पटना का रास्ता 1,274 किलोमीटर का होगा। इस मार्ग में करनाल, मेरठ, बुलंदशहर, एटा, लखनऊ, अयोध्या, बस्ती, गोरखपुर, कुशीनगर और गोपालगंज शामिल हैं।
पूर्णिया जाने वाली बसों के मार्गों में लखनऊ, गोरखपुर, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर और दरभंगा जैसे शहर प्रमुख पड़ाव होंगे। गुरुग्राम से पूर्णिया की दूरी 1,267 किलोमीटर, पानीपत से 1,361 किलोमीटर और अंबाला से 1,470 किलोमीटर निर्धारित की गई है।
गया के लिए गुरुग्राम से 1,081 किलोमीटर, पानीपत से 1,099 किलोमीटर और अंबाला से 1,224 किलोमीटर के मार्ग रखे गए हैं। इन रास्तों में दिल्ली, अलीगढ़, फिरोजाबाद, कानपुर, प्रयागराज, मुगलसराय, भभुआ और सासाराम जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
मधुबनी के लिए गुरुग्राम, पानीपत और अंबाला से क्रमशः 1,183, 1,264 और 1,378 किलोमीटर के मार्ग निर्धारित किए गए हैं। इनमें भी लखनऊ, गोरखपुर, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर और दरभंगा जैसे प्रमुख शहरों से होकर बसें गुजरेंगी।
बसों के चलने का समय और फेरे अभी तय नहीं
परिवहन समझौते में मार्ग और उनकी दूरी का विवरण दिया गया है, लेकिन बसों की समय-सारिणी और रोजाना चलने वाले फेरों की संख्या अलग से निर्धारित की जाएगी। इसके लिए दोनों राज्यों के परिवहन प्राधिकरण अपने परिवहन उपक्रमों से विचार-विमर्श करेंगे।
बसों की श्रेणी के अनुसार एक्सप्रेस, डीलक्स, वातानुकूलित डीलक्स और वातानुकूलित स्लीपर जैसी सेवाएं संचालित की जा सकती हैं। बसों पर गंतव्य का नाम हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लिखना होगा।
समझौते में जरूरत के अनुसार नए मार्ग शामिल करने और मौजूदा मार्गों पर बसों के फेरे बढ़ाने का प्रावधान भी रखा गया है। हालांकि, इसके लिए दोनों राज्यों के संबंधित परिवहन प्राधिकरणों की सहमति जरूरी होगी।
10 साल से पुरानी बसों के संचालन पर रोक
यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए समझौते में बसों की उम्र से संबंधित शर्तें भी रखी गई हैं। इसके तहत अंतरराज्यीय मार्गों पर 10 साल तक की उम्र वाली बसों को संचालन की अनुमति का प्रावधान है। वाहन बदले जाने पर नए और उच्चतर मॉडल को प्राथमिकता देनी होगी।
नए स्थायी परमिट और वाहन बदलने के लिए बसों का संबंधित राज्यों में स्वीकृत बस बॉडी कोड के अनुरूप होना भी जरूरी होगा। इससे बसों के तकनीकी मानकों और सुरक्षा संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है।EX GAZ 864
टैक्स बकाया होने पर नया परमिट नहीं मिलेगा
समझौते में दोनों राज्यों के बीच परमिट और कर से संबंधित जानकारी साझा करने की व्यवस्था की गई है। स्थायी बस परमिट और दूसरे राज्य से मान्य कराए गए परमिट का ब्योरा हर तीन महीने में इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से साझा किया जाएगा।
किसी एक राज्य में टैक्स बकाया होने पर संबंधित वाहन के लिए नया परमिट जारी नहीं किया जाएगा। परमिट का नवीनीकरण, वाहन बदलने या परमिट वापस करने से पहले भी दोनों राज्यों के बकाया कर की स्थिति देखी जाएगी।
अनुबंध पर चलने वाली यात्री बसों के लिए अलग व्यवस्था रखी गई है। ऐसे अस्थायी परमिट की अवधि एक बार में 15 दिन से अधिक नहीं होगी। पर्यटक बसों के लिए यात्रा कार्यक्रम, यात्रियों की सूची और आने-जाने की तारीखों का विवरण देना जरूरी होगा।EX GAZ 864
बसों में ट्रैकिंग उपकरण और आपातकालीन बटन जरूरी
यात्रियों की सुरक्षा के लिए बसों में वाहन लोकेशन ट्रैकिंग उपकरण और कम से कम एक आपातकालीन बटन लगाना अनिवार्य होगा। इसके अलावा बस चालकों का पुलिस सत्यापन भी जरूरी रखा गया है।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से होकर गुजरने वाली बसों को लागू प्रदूषण मानकों का पालन करना होगा। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी अधिकृत एजेंसियों के निर्देश भी मानने होंगे। रास्ते में बस खराब होने पर दोनों राज्यों के बीच एक-दूसरे के वाहनों को सहायता देने की व्यवस्था भी समझौते में शामिल है।
बस सेवा शुरू होने की तारीख अभी स्पष्ट नहीं
हरियाणा और बिहार के बीच परिवहन समझौते में 12 मार्गों का विवरण और संचालन से जुड़े नियम तय किए गए हैं। लेकिन यात्रियों को इन मार्गों पर बस सेवा कब से मिलेगी, इसका स्पष्ट कार्यक्रम अभी सामने नहीं आया है।
इसके लिए समय-सारिणी, बसों की उपलब्धता और परमिट से जुड़ी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। इसलिए फिलहाल यात्री इन मार्गों को प्रस्तावित अंतरराज्यीय बस कनेक्टिविटी के रूप में देखें। बसों के संचालन की तारीख और टिकट संबंधी जानकारी संबंधित परिवहन विभागों की अगली घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।










