हरियाणा में बाजरा 2300 से कम बिका तो क्या मिलेंगे पूरे 2900 रुपये? जानें भावांतर का नियम। Bajra MSP
लोकल हरियाणा, रेवाड़ी। हरियाणा में बाजरे का न्यूनतम समर्थन मूल्य इस बार 2900 रुपये प्रति क्विंटल है, लेकिन मंडियों में निजी व्यापारियों की बोली इससे काफी नीचे चल रही है। मंगलवार, 6 अक्टूबर को रेवाड़ी अनाज मंडी में बाजरा…

लोकल हरियाणा, रेवाड़ी। हरियाणा में बाजरे का न्यूनतम समर्थन मूल्य इस बार 2900 रुपये प्रति क्विंटल है, लेकिन मंडियों में निजी व्यापारियों की बोली इससे काफी नीचे चल रही है। मंगलवार, 6 अक्टूबर को रेवाड़ी अनाज मंडी में बाजरा 2150 से 2350 रुपये प्रति क्विंटल तक बिका। ऐसे में किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल है कि अगर बाजरा 2300 रुपये से भी कम भाव पर बिकता है तो भावांतर जोड़ने के बाद पूरे 2900 रुपये मिलेंगे या नहीं।
हरियाणा सरकार ने इस बार बाजरे की सरकारी खरीद के लिए 2300 रुपये प्रति क्विंटल की दर तय की है। इसके साथ 600 रुपये प्रति क्विंटल तक भावांतर मिलने पर किसान को 2900 रुपये मिलते हैं। सरकार ने 25 सितंबर को यह भी कहा था कि अगर खुले बाजार में किसान को 2300 रुपये से अधिक भाव मिलता है तो बिक्री मूल्य और 2900 रुपये के बीच का अंतर सरकार देगी।
2300 रुपये में बाजरा बिका तो मिलेंगे पूरे 2900 रुपये
इसका सबसे सीधा हिसाब 2300 रुपये की बिक्री पर बनता है। किसान को मंडी से 2300 रुपये प्रति क्विंटल मिलते हैं और सरकार 600 रुपये भावांतर देती है तो कुल रकम 2900 रुपये प्रति क्विंटल हो जाती है।
रोहतक में 1 अक्टूबर को जारी सरकारी जानकारी में भी भावांतर की राशि 600 रुपये प्रति क्विंटल बताई गई है। अधिकारियों ने आढ़तियों से बाजरा उचित भाव पर खरीदने को कहा था, ताकि 600 रुपये की भावांतर राशि जुड़ने के बाद किसान को न्यूनतम समर्थन मूल्य मिल सके।
2300 रुपये से ज्यादा भाव मिला तो भावांतर कम होगा
किसान का बाजरा अगर 2300 रुपये से ज्यादा भाव पर बिकता है तो उसे हर हालत में पूरे 600 रुपये अलग से मिलने की बात सरकारी घोषणा में नहीं है।
25 सितंबर की मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार खुले बाजार में 2300 रुपये से अधिक भाव मिलने पर बिक्री मूल्य और 2900 रुपये के बीच का अंतर दिया जाएगा।
मसलन बाजरा 2350 रुपये प्रति क्विंटल बिकता है तो 2900 रुपये तक पहुंचने के लिए अंतर 550 रुपये रह जाता है। इसी तरह 2400 रुपये की बिक्री पर अंतर 500 रुपये और 2500 रुपये पर 400 रुपये बनता है।
इसलिए 2350 रुपये की बोली में सीधे 600 रुपये जोड़कर 2950 रुपये मान लेना सरकार की 25 सितंबर वाली व्यवस्था से मेल नहीं खाता।
बाजरा 2150 या 2200 रुपये में बिका तो कितना मिलेगा?
किसानों में अभी सबसे ज्यादा उलझन इसी स्थिति को लेकर है। रेवाड़ी मंडी में मंगलवार को कुछ ढेरियों की बोली 2150 से 2200 रुपये प्रति क्विंटल तक लगी। अगर इसमें केवल 600 रुपये की तय भावांतर राशि जोड़ी जाए तो 2150 रुपये की बिक्री पर कुल 2750 रुपये और 2200 रुपये की बिक्री पर 2800 रुपये बनते हैं।
लेकिन सरकार की 25 सितंबर की घोषणा में कहा गया है कि किसानों को बाजरे का 2900 रुपये प्रति क्विंटल भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा और इस बार सरकार स्वयं 2300 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बाजरा खरीदेगी।
उपलब्ध सरकारी जानकारी में 2300 रुपये से कम भाव पर निजी व्यापारी को बेचे गए बाजरे के लिए अलग से यह नहीं समझाया गया है कि ऐसे किसान को 600 रुपये ही मिलेंगे या 2900 रुपये तक पहुंचाने के लिए ज्यादा अंतर दिया जाएगा।
यही वजह है कि 2150 या 2200 रुपये की निजी बोली वाले किसान के लिए केवल बिक्री भाव में 600 रुपये जोड़कर अंतिम भुगतान तय मानना अभी सही नहीं होगा।
किसान को 2300 रुपये की सरकारी खरीद का विकल्प भी है
सरकार ने इस सीजन में बाजरे की सरकारी खरीद 2300 रुपये प्रति क्विंटल की दर से करने का फैसला किया है। इस आधार पर 600 रुपये भावांतर जुड़ने के बाद 2900 रुपये का समर्थन मूल्य पूरा होता है।
रेवाड़ी में निजी व्यापारियों की बोली गुणवत्ता के आधार पर अलग-अलग लग रही है। अच्छी गुणवत्ता वाले बाजरे को ज्यादा और दूसरी ढेरियों को कम भाव मिल रहा है। ऐसे में 2300 रुपये से नीचे निजी बिक्री और सरकारी खरीद की व्यवस्था के बीच का फर्क किसानों के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है।
भावांतर लेने के लिए मेरी फसल-मेरा ब्यौरा जरूरी
भावांतर का लाभ हर किसान को केवल मंडी में बाजरा बेच देने से नहीं मिलेगा। सरकार के अनुसार खरीद और भावांतर की राशि मेरी फसल-मेरा ब्यौरा में दर्ज रिकॉर्ड और जारी किए गए जे-फॉर्म के आधार पर तय की जाएगी।
किसान की फसल का पोर्टल पर पंजीकरण और रिकॉर्ड सही होना इसलिए जरूरी है। सरकार ने दूसरे राज्यों का बाजरा हरियाणा की मंडियों में बेचने से रोकने के लिए एरिया वेरिफिकेशन और मंडियों की निगरानी बढ़ाने के भी निर्देश दिए हैं।
इस साल बाजरे का MSP 2900 रुपये
केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन सीजन 2026-27 के लिए बाजरे का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2900 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। पिछले साल यह 2775 रुपये था, यानी इस बार 125 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है।
हरियाणा में सरकार ने MSP पर सीधे पूरी खरीद करने के बजाय 2300 रुपये की खरीद दर और भावांतर की व्यवस्था अपनाई है। 2300 रुपये की बिक्री पर 600 रुपये जोड़कर 2900 रुपये का भाव पूरा होता है, जबकि इससे अधिक निजी भाव मिलने पर 2900 रुपये तक का बचा हुआ अंतर देने की व्यवस्था बताई गई है।
फिलहाल सबसे ज्यादा स्पष्टता 2300 रुपये या उससे ऊपर की बिक्री के मामले में है। रेवाड़ी जैसी मंडियों में जहां निजी बोली 2150 से 2200 रुपये तक जा रही है, वहां ऐसे सौदों पर भावांतर की अंतिम गणना किस आधार पर होगी, इस बारे में अलग स्पष्ट निर्देश सामने आने पर ही किसान को मिलने वाली अंतिम रकम निश्चित रूप से कही जा सकेगी।








