रविवार, 20 सितम्बर 2026 | 15:42 ISTहमसे जुड़ें:
योजना

EPFO की वेज लिमिट 25 हजार, जानें कितनी घटेगी सैलरी और पहले से नौकरी कर रहे लोगों पर क्या असर?

लोकल हरियाणा, गुरुग्राम। ईपीएफओ के तहत अनिवार्य कवरेज की वेज लिमिट 15 हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये महीना कर दी गई है। केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार, 16 सितंबर 2026 को इसे मंजूरी दी और नई सीमा 17 सितंबर से लागू हो गई।…

ईपीएफओ की 25 हजार रुपये वेज लिमिट के बाद पीएफ और सैलरी का नया हिसाब
ईपीएफओ की 25 हजार रुपये वेज लिमिट के बाद पीएफ और सैलरी का नया हिसाब
खबर की मुख्य बातें
  • ईपीएफओ वेज लिमिट अब 25 हजार रुपये
  • नई सीमा 17 सितंबर से लागू
  • 25 हजार वेज पर पीएफ 3 हजार तक

लोकल हरियाणा, गुरुग्राम। ईपीएफओ के तहत अनिवार्य कवरेज की वेज लिमिट 15 हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये महीना कर दी गई है। केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार, 16 सितंबर 2026 को इसे मंजूरी दी और नई सीमा 17 सितंबर से लागू हो गई।

केंद्र के मुताबिक इससे देशभर में 51 लाख से ज्यादा अतिरिक्त कर्मचारी पीएफ, पेंशन और बीमा के दायरे में आ सकते हैं। वहीं गुरुग्राम पूर्व की क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त डॉ. अर्चना जानू ने 19 सितंबर को बताया कि गुरुग्राम में करीब 3 लाख अतिरिक्त कर्मचारियों के ईपीएफओ से जुड़ने की उम्मीद है।

नई सीमा का असर खास तौर पर उन कर्मचारियों पर पड़ेगा जो अब तक 15 हजार रुपये से ज्यादा वेज होने के कारण अनिवार्य ईपीएफ कवरेज से बाहर थे। हालांकि 25 हजार रुपये का मतलब सीधे ग्रॉस सैलरी नहीं है और हर कर्मचारी की इन-हैंड सैलरी एक जैसी नहीं घटेगी।

25 हजार की सीमा बेसिक सैलरी पर लगेगी या ग्रॉस पर?

ईपीएफओ में पीएफ की गणना सीधे पूरी ग्रॉस सैलरी पर नहीं की जाती। आधिकारिक नियमों के मुताबिक पीएफ वेज में मुख्य रूप से बेसिक वेज, महंगाई भत्ता और रिटेनिंग अलाउंस, जहां लागू हो, शामिल होते हैं। कर्मचारी और नियोक्ता सामान्य तौर पर इसी वेज का 12-12 प्रतिशत योगदान करते हैं।

इसलिए किसी कर्मचारी की ग्रॉस सैलरी 30 हजार रुपये है, लेकिन उसकी पीएफ वेज 22 हजार रुपये बनती है तो केवल ग्रॉस सैलरी देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि पीएफ कितना कटेगा।

करनाल में पहला उद्यान मेला शुरू, 80 से ज्यादा स्टॉल; किसानों को एक जगह मिलेंगी नई तकनीक

रोहतक में 21 सितंबर से 59वें राज्य स्तरीय स्कूली खेल, 1242 खिलाड़ी हॉकी-योग में दिखाएंगे दम

कैथल में 21 सितंबर से 17 अक्टूबर तक सेवा सेतु-अंत्योदय मेले, इन परिवारों को मिलेगा बड़ा फायदा

नई 25 हजार रुपये की सीमा का मतलब यह है कि 15 हजार से 25 हजार रुपये के बीच पीएफ वेज पर नई नौकरी जॉइन करने वाले कर्मचारी अब अनिवार्य ईपीएफओ कवरेज में आएंगे। इससे पहले 15 हजार रुपये से ज्यादा वेज पर नया कर्मचारी कुछ मामलों में अनिवार्य कवरेज से बाहर रह सकता था।

हर महीने कितना पीएफ कटेगा और इन-हैंड सैलरी कितनी घटेगी?

सामान्य 12 प्रतिशत पीएफ दर के हिसाब से कर्मचारी के हिस्से का योगदान इस तरह बनेगा। ईपीएफओ के मौजूदा नियमों में कर्मचारी और नियोक्ता दोनों की सामान्य योगदान दर 12 प्रतिशत है।

पीएफ वेजकर्मचारी का 12% पीएफ
15,000 रुपये1,800 रुपये
18,000 रुपये2,160 रुपये
20,000 रुपये2,400 रुपये
22,000 रुपये2,640 रुपये
25,000 रुपये3,000 रुपये

यहां दो तरह के कर्मचारियों का असर अलग होगा।

अगर कोई कर्मचारी पहले पीएफ में शामिल ही नहीं था और अब नई सीमा के कारण पहली बार अनिवार्य कवरेज में आता है तो उसकी पीएफ वेज के हिसाब से सैलरी से 12 प्रतिशत योगदान कटना शुरू हो सकता है। 25 हजार रुपये की पूरी पीएफ वेज होने पर यह रकम 3 हजार रुपये महीना होगी।

लेकिन जो कर्मचारी पहले से पीएफ में है और उसका योगदान पुराने 15 हजार रुपये के वेज कैप पर 1,800 रुपये था, उसके मामले में 25 हजार रुपये तक पूरा नया कैप लागू होने पर कर्मचारी योगदान का अंतर अधिकतम 1,200 रुपये महीना बनता है।

इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि हर कर्मचारी की इन-हैंड सैलरी सीधे 3 हजार रुपये घट जाएगी। वास्तविक असर कर्मचारी की मौजूदा पीएफ वेज, कंपनी के सैलरी स्ट्रक्चर और पहले से हो रही पीएफ कटौती पर निर्भर करेगा।

कंपनी कितना जमा करेगी, ईपीएस पेंशन में कितना जाएगा?

नियोक्ता भी सामान्य तौर पर कर्मचारी की पीएफ वेज का 12 प्रतिशत जमा करता है। सरकारी जानकारी के मुताबिक नियोक्ता के हिस्से में से 8.33 प्रतिशत कर्मचारी पेंशन योजना यानी ईपीएस में और 3.67 प्रतिशत ईपीएफ में जाता है। केंद्र सरकार भी पेंशन फंड में 1.16 प्रतिशत का योगदान देती है।

अगर पूरी पीएफ वेज 25 हजार रुपये मानी जाए तो नियोक्ता का 12 प्रतिशत हिस्सा 3 हजार रुपये बनता है। सामान्य गणना में इसमें करीब 2,083 रुपये ईपीएस और करीब 917 रुपये ईपीएफ में जाएंगे।

नियोक्ता का यह 3 हजार रुपये कर्मचारी की सैलरी से पीएफ की तरह सीधे नहीं काटा जाता। हालांकि जिन कंपनियों में पूरा वेतन पैकेज सीटीसी के आधार पर तय होता है, वहां सैलरी ब्रेकअप पर इसका असर अलग हो सकता है।

नई सीमा के दायरे में आने वाले पात्र कर्मचारियों को सिर्फ पीएफ बचत ही नहीं, बल्कि ईपीएस पेंशन और ईडीएलआई बीमा का कवरेज भी मिलेगा। केंद्र ने नई सीमा बढ़ाने के पीछे इन्हीं सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं का दायरा बढ़ाने की बात कही है।

पहले से नौकरी कर रहे लोगों पर क्या असर होगा?

पहले से ईपीएफ सदस्य कर्मचारियों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वेतन बढ़ने से उनकी ईपीएफ सदस्यता अपने आप खत्म नहीं होती। जो व्यक्ति पहले से सदस्य है, वह सिर्फ इसलिए पीएफ से बाहर नहीं हो सकता कि बाद में उसकी सैलरी वेज लिमिट से ज्यादा हो गई। ईपीएफओ के नियम पहले से सदस्य और नई नौकरी में पहली बार शामिल होने वाले कर्मचारी में फर्क करते हैं।

अगर किसी कर्मचारी का पीएफ पहले से उसकी वास्तविक ज्यादा वेज पर कट रहा है तो नई 25 हजार रुपये की सीमा से उसकी कटौती में जरूरी नहीं कि कोई बदलाव आए।

वहीं अगर पीएफ पुराने 15 हजार रुपये के कैप पर सीमित था तो नई सीमा लागू होने के बाद कंपनी के पेरोल में योगदान का आधार बढ़ सकता है। ऐसे कर्मचारी को अपनी अगली सैलरी स्लिप में पीएफ वेज और कर्मचारी पीएफ योगदान जरूर देखना चाहिए।

क्या 25 हजार वेज वाला कर्मचारी पीएफ से बाहर हो सकता है?

नई नौकरी में 25 हजार रुपये तक की लागू पीएफ वेज वाले कर्मचारी अब अनिवार्य कवरेज के दायरे में आएंगे। ऐसे कर्मचारी सिर्फ अपनी इच्छा से पीएफ से बाहर रहने का विकल्प नहीं चुन सकते। केंद्र ने साफ किया है कि 15 हजार से 25 हजार रुपये के बीच आने वाले कर्मचारियों को नई सीमा के बाद statutory social security framework में लाया जाएगा।

दूसरी तरफ ऐसा नया कर्मचारी जिसकी पीएफ वेज 25 हजार रुपये से ज्यादा है और जो पहले कभी ईपीएफ सदस्य नहीं रहा, उसकी स्थिति अलग हो सकती है। ऐसे मामलों में ईपीएफओ के excluded employee और voluntary coverage से जुड़े नियम लागू होते हैं।

ईपीएफओ की वेज लिमिट इससे पहले सितंबर 2014 में 15 हजार रुपये की गई थी। करीब 12 साल बाद इसे बढ़ाकर 25 हजार रुपये किया गया है।

लेखक

Sandeep Kumar

संदीप कुमार LocalHaryana.com के संस्थापक और संपादक हैं। वे वर्ष 2020 से डिजिटल पत्रकारिता और ऑनलाइन समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। वे मुख्य रूप से हरियाणा समाचार, सरकारी योजनाएं, नौकरियां, शिक्षा, खेतीबाड़ी और मौसम से जुड़े विषयों पर लेखन और संपादन करते हैं। उनका प्रयास पाठकों तक तथ्य आधारित, स्पष्ट और उपयोगी जानकारी सरल हिंदी में पहुँचाना है। LocalHaryana.com पर प्रकाशित सामग्री उपलब्ध आधिकारिक सूचनाओं और विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर तैयार की जाती है।

और पढ़ें

सभी देखें