कुरुक्षेत्र। हरियाणा में नियमितीकरण की मांग को लेकर अतिथि अध्यापक रविवार, 25 अक्टूबर को कुरुक्षेत्र में न्याय रैली करेंगे। रैली के बाद शिक्षक पैदल मार्च करते हुए चंडीगढ़ जाने और राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने की तैयारी में हैं। अतिथि अध्यापक संयुक्त संघर्ष मोर्चा का कहना है कि वर्ष 2014 की नियमितीकरण नीति के तहत पात्र शिक्षकों को लाभ देने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जानी चाहिए।
मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष कृष्ण धारशूल ने कहा कि शिक्षा विभाग में लंबे समय से सेवाएं दे रहे 10,757 अतिथि अध्यापकों के नियमितीकरण की प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरी की जानी चाहिए। उनका कहना है कि इससे शिक्षकों को अपनी सेवा स्थिति के बारे में स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।
मोर्चा के अनुसार, नियमितीकरण की मांग को लेकर 21 अक्टूबर को सिरसा से न्याय यात्रा शुरू की गई थी। यह यात्रा 25 अक्टूबर को कुरुक्षेत्र पहुंचने वाली है। यहां रैली के बाद न्याय रथ के साथ चंडीगढ़ की ओर पैदल मार्च निकालने और राज्यपाल के समक्ष अपनी मांग रखने की योजना है।
सरकार से नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू करने की मांग
प्रदेश प्रवक्ता कुलदीप झरौली के अनुसार, अतिथि अध्यापकों से संबंधित मामलों में विभागीय स्तर पर व्यक्तिगत सुनवाई की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन नियमितीकरण को लेकर अंतिम निर्णय का इंतजार है। मोर्चा ने कहा है कि मांगों का समाधान होने तक लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रहेगा।
महिला विंग की अध्यक्ष मैना यादव ने भी नियमितीकरण को लेकर जल्द ठोस कदम उठाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को उनकी पात्रता के अनुसार नियमितीकरण का लाभ मिलना चाहिए।
मोर्चा ने चेतावनी दी है कि मांगों पर समाधान नहीं निकलने की स्थिति में आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। संगठन ने हाई कोर्ट में अवमानना याचिका दायर करने की तैयारी की बात भी कही है। हालांकि, इस रिसर्च में याचिका दायर होने की पुष्टि नहीं मिली है।
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नियमितीकरण पर अदालत के आदेशों का क्या है मामला?
अतिथि अध्यापक अपनी मांग के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट और पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के फैसलों का हवाला दे रहे हैं। उनका कहना है कि वर्ष 2014 की नियमितीकरण नीति के तहत पात्र शिक्षकों को लाभ मिलना चाहिए।
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की डबल बेंच ने 6 अगस्त 2026 को Sukhvinder Singh बनाम State of Haryana मामले में कहा था कि राज्य सरकार संबंधित याचिकाकर्ताओं के नियमितीकरण के दावों पर तथ्यों और लागू कानूनी सिद्धांतों के आधार पर विचार करे। पात्र पाए जाने पर नियमितीकरण का लाभ दिया जाए, अन्यथा कारण बताते हुए आदेश पारित किया जा सकता है। अदालत ने आदेश की प्रति मिलने से दो महीने के भीतर विचार प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया था।
यह आदेश संबंधित मामले के याचिकाकर्ताओं से जुड़ा है। इसे हरियाणा के सभी अतिथि अध्यापकों को स्वतः नियमित करने का सार्वभौमिक आदेश नहीं माना जा सकता। अब अतिथि अध्यापक सरकार से अपने दावों पर निर्णय लेने और पात्र शिक्षकों के नियमितीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।





