सिरसा जिले के ढुकड़ा में 15 पशुपालकों से शुरू हुई दूध समिति, अब 663 सदस्य और 1.71 करोड़ टर्नओवर
सिरसा। जिले के नाथूसरी चोपटा खंड के गांव ढुकड़ा में करीब 40 साल पहले 15 पशुपालकों से शुरू हुई दूध सहकारी समिति से अब 663 सदस्य जुड़ चुके हैं। सोमवार, 5 अक्टूबर को जिला प्रशासन की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, वर्ष 2025…

सिरसा। जिले के नाथूसरी चोपटा खंड के गांव ढुकड़ा में करीब 40 साल पहले 15 पशुपालकों से शुरू हुई दूध सहकारी समिति से अब 663 सदस्य जुड़ चुके हैं। सोमवार, 5 अक्टूबर को जिला प्रशासन की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, वर्ष 2025 में समिति ने प्रतिदिन करीब 900 लीटर दूध का संकलन किया और सालाना टर्नओवर 1 करोड़ 71 लाख 82 हजार 813 रुपये तक पहुंच गया।
वर्ष 1985 में समिति की शुरुआत हुई थी। उस समय रोज करीब 50 से 60 लीटर दूध जमा होता था और सालाना कारोबार करीब 15 हजार रुपये था। धीरे-धीरे गांव के पशुपालक समिति से जुड़ते गए। वर्ष 2020 तक सदस्य संख्या 500 और रोजाना दूध संग्रह करीब 500 लीटर हो चुका था।
पांच साल बाद 2025 में सदस्यों की संख्या बढ़कर 663 और दूध संग्रह करीब 900 लीटर प्रतिदिन दर्ज किया गया। गर्मी या शुष्क मौसम में दूध उत्पादन घटने के बावजूद करीब 300 पशुपालक नियमित रूप से समिति में दूध जमा करवाते हैं।

फैट और एसएनएफ के आधार पर मिलता है दूध का भुगतान
समिति में दूध का भुगतान उसकी गुणवत्ता, फैट और एसएनएफ के आधार पर किया जाता है। समिति के सचिव धर्मपाल सिंह के अनुसार शुरुआती समय में दूध का भाव करीब 2 रुपये प्रति लीटर था। अब गुणवत्ता के अनुसार यह 82 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच चुका है।
समिति सिरसा जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ यानी वीटा मिल्क यूनियन सिरसा से जुड़ी हुई है। दूध की गुणवत्ता और ताजगी बनाए रखने के लिए यहां 2,500 लीटर क्षमता का बल्क मिल्क कूलर भी लगाया गया है।
सुबह और शाम पशुपालकों से मिलने वाले दूध को इसमें तुरंत ठंडा किया जाता है। इससे खासकर गर्मी के मौसम में दूध खराब होने का खतरा कम होता है और मिल्क प्लांट तक पहुंचने से पहले उसकी गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिलती है।

पशुपालकों के साथ परिवारों को भी मिला योजनाओं का लाभ
दूध समिति का दायरा केवल दूध खरीद और बिक्री तक सीमित नहीं रहा है। जिला प्रशासन की ओर से जारी जानकारी के अनुसार समिति के सदस्यों तक सरकारी योजनाओं का लाभ भी पहुंचाया गया है। वर्ष 2025 में समिति से जुड़े 33 सदस्यों ने छात्रवृत्ति योजना का लाभ लिया।
समिति की ओर से गांव में पौधरोपण और स्वच्छता से जुड़े काम भी किए जाते हैं। समिति परिसर, पंचायती जमीन और सड़कों के किनारे पौधे लगाए जाते हैं, जबकि दूध संग्रह केंद्र और आसपास के क्षेत्र में सफाई अभियान चलाए जाते हैं।
समिति के अनुसार इसकी इस यात्रा में पशुपालकों की लगातार भागीदारी के साथ मिल्क प्लांट सिरसा से मिलने वाले तकनीकी मार्गदर्शन और सहयोग की भी भूमिका रही है। करीब 60 लीटर रोजाना दूध से शुरू हुई समिति का 900 लीटर प्रतिदिन तक पहुंचना और 15 हजार रुपये के सालाना कारोबार का 1.71 करोड़ रुपये से अधिक होना पिछले चार दशकों में हुए बदलाव को दिखाता है।








