गुरुवार, 23 जुलाई 2026 | 04:51 ISTFollow us at:
हरियाणा

5 लाख तक फसल बेचने पर फैमिली आईडी में नहीं जुड़ेगी आय, अब ई-खरीद से तय होगी किसानों की आय

हरियाणा सरकार ने छोटे किसानों और पट्टे पर खेती करने वालों को बड़ी राहत दी है। अब ई-खरीद के माध्यम से पांच लाख रुपये से कम की फसल बिक्री करने पर फैमिली आईडी में आय शामिल नहीं होगी। मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल का डेटा भी…

5 लाख तक फसल बेचने पर फैमिली आईडी में नहीं जुड़ेगी आय, अब ई-खरीद से तय होगी किसानों की आय

हरियाणा सरकार ने छोटे किसानों और पट्टे पर खेती करने वालों के लिए एक अहम फैसला लिया है। अब ई-खरीद (ई-प्रोक्योरमेंट) के माध्यम से पांच लाख रुपये से कम की फसल बिक्री करने पर परिवार की आय फैमिली आईडी में शामिल नहीं की जाएगी। इसके साथ ही मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल का ब्योरा भी परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) से हटा दिया गया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देश पर लिए गए इस निर्णय का सबसे अधिक लाभ बटाई (पट्टे) पर खेती करने वाले या तीन एकड़ तक के किसानों को होगा。

क्या बदला है पुरानी व्यवस्था में

पहले मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर दर्ज फसल बिक्री का पूरा मूल्य परिवार की आय के रूप में दर्ज हो जाता था। इससे कई किसानों की वार्षिक आय वास्तविकता से कहीं अधिक दिखाई देती थी। नतीजतन, पात्र किसान परिवार सरकारी योजनाओं, सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों और आर्थिक सहायता योजनाओं के लाभ से वंचित हो जाते थे।

नए नियमों के अनुसार अब मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल के आधार पर दर्ज फसल बिक्री मूल्य को परिवार की आय में शामिल नहीं किया जाएगा। इसके स्थान पर केवल पांच लाख रुपये से अधिक की ई-खरीद से संबंधित डेटा को ही आय निर्धारण के लिए आधार माना जाएगा।

किन किसानों को होगा सबसे अधिक लाभ

इस फैसले का सबसे बड़ा लाभ उन किसानों को मिलेगा जिनके पास अपनी जमीन नहीं है और वे पट्टे पर खेती करते हैं। साथ ही तीन एकड़ तक की जमीन वाले छोटे किसान भी इस राहत के दायरे में आएंगे। दरअसल, सरकारी योजनाओं के लिए अधिकतम 1.80 लाख रुपये वार्षिक आय की शर्त रखी गई है। पहले फसल बिक्री की पूरी राशि आय में गिने जाने के कारण कई किसान इस सीमा से ऊपर निकल जाते थे और योजनाओं से बाहर हो जाते थे।

अब 5 लाख रुपये तक की कृषि आय को आय गणना से बाहर रखा जाएगा। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्पष्ट किया है कि कृषि से होने वाली 5 लाख रुपये तक की वार्षिक आय के आधार पर किसी परिवार को उन योजनाओं से वंचित नहीं किया जाएगा, जिनके लिए 1.80 लाख रुपये वार्षिक आय सीमा निर्धारित है।

क्यों लिया गया यह निर्णय

हरियाणा परिवार पहचान प्राधिकरण के राज्य समन्वयक डॉ. सतीश खोला ने बताया कि किसानों की मांग और सुझावों को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने इस व्यवस्था में सुधार करवाया है। पहले कई किसान परिवार केवल तकनीकी त्रुटियों या डेटा संबंधी विसंगतियों के कारण योजनाओं के लाभ से वंचित रह जाते थे।

डॉ. खोला के अनुसार फैमिली आईडी में किया गया यह सुधार किसानों की वास्तविक आर्थिक स्थिति का अधिक सटीक आकलन सुनिश्चित करेगा। इससे पात्र किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में मदद मिलेगी।

आय सत्यापन की नई व्यवस्था

मुख्यमंत्री ने नागरिक संसाधन सूचना विभाग (सीआरआईडी) को निर्देश दिए हैं कि परिवार पहचान पत्र में आय सत्यापन का कार्य ग्राम सभाओं के माध्यम से प्राथमिकता पर पूरा कराया जाए। ग्राम सभा द्वारा लिया गया निर्णय अंतिम माना जाएगा।

सीआरआईडी के आयुक्त और सचिव जे. गणेशन ने बताया कि प्रदेश में कई परिवारों की आय का सत्यापन लंबित होने के कारण उन्हें योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। अलग-अलग रिपोर्टों में आय संबंधी अंतर आने से सही निर्णय लेने में कठिनाई हो रही थी। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि टीम लीडर और लोकल ऑपरेटर की ओर से तैयार आय रिपोर्ट को ग्राम सभा में रखा जाए और ग्राम सभा के निर्णय को अंतिम माना जाए。

पीपीपी 2.0 और स्मार्ट कार्ड की तैयारी

विभाग जल्द ही पीपीपी 2.0 नाम से एक नया डेटा प्लेटफॉर्म तैयार करेगा। इस अपग्रेड से ऑनलाइन फैमिली आईडी वेरिफिकेशन और आय अपडेट की प्रक्रिया और सरल हो जाएगी। इसके अलावा लोगों को पीपीपी स्मार्ट कार्ड भी उपलब्ध कराए जाएंगे।

परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) हरियाणा सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसके तहत प्रत्येक परिवार को एक अद्वितीय 8 अंकों की फैमिली आईडी जारी की जाती है। वर्तमान में हरियाणा के 23 जिलों में 77,41,912 परिवार और 2,98,47,359 सदस्य पीपीपी के तहत पंजीकृत हैं।

क्या है दयालु योजना में आधार लिंक की समस्या

बैठक में मुख्यमंत्री ने दयालु योजना में आधार लिंक से संबंधित समस्या के समाधान के भी निर्देश दिए। इसके लिए जिला समाज कल्याण अधिकारी और अतिरिक्त उपायुक्त की संयुक्त कमेटी बनाई जाएगी। सीएम ने सेवा विभाग और सीआरआईडी को आपसी तालमेल के साथ कार्य करने के निर्देश दिए हैं。

लंबित मामलों के निपटान की समयसीमा

मुख्यमंत्री ने लंबित आयु सत्यापन मामलों को अतिरिक्त उपायुक्त के माध्यम से निपटाने के निर्देश दिए हैं। सभी लंबित मामलों को एक महीने के भीतर समाप्त करने का आदेश दिया गया है।

किसानों के लिए क्या है खास बात

इस फैसले से जहां एक तरफ छोटे किसानों को राहत मिलेगी, वहीं दूसरी तरफ पट्टे पर खेती करने वाले किसान भी अब सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे। पहले फसल बिक्री की पूरी राशि आय में दर्ज होने के कारण वे 1.80 लाख रुपये की आय सीमा से बाहर हो जाते थे। अब 5 लाख रुपये तक की फसल बिक्री को आय में नहीं गिना जाएगा, जिससे वे सरकारी योजनाओं, पेंशन, राशन, छात्रवृत्ति और अन्य कल्याणकारी कार्यक्रमों के पात्र बने रहेंगे।

लेखक

Kuldeep Singh

कुलदीप सिंह LocalHaryana.com पर लेखक के रुप में कार्यरत हैं। वे वर्ष 2021 से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। वे मुख्य रूप से हरियाणा समाचार, सरकारी योजनाएं, नौकरियां, शिक्षा, खेतीबाड़ी और मौसम से जुड़े विषयों पर लेखन करते हैं। उनका प्रयास पाठकों तक तथ्य आधारित, स्पष्ट और उपयोगी जानकारी सरल हिंदी में पहुँचाना है। LocalHaryana.com पर प्रकाशित सामग्री उपलब्ध आधिकारिक सूचनाओं और विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर तैयार की जाती है।

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