हरियाणा सरकार का कच्चे कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षित के लिए लागू करेगी नया सिस्टम, बनेगें सुपरन्यूमरेरी पद
हरियाणा कच्चे कर्मचारियों के लिए सुपरन्यूमरेरी पद बनेंगे। जानें एचकेआरएन कर्मियों की पात्रता, रेगुलर पोस्ट फ्रीज, सेवा सुरक्षा और पोर्टल सिस्टम।

लोकल हरियाणा, चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने सेवा सुरक्षा कानून के दायरे में आने वाले पात्र कच्चे कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षित रखने के लिए नया सिस्टम लागू करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। अब हर पात्र अनुबंधित कर्मचारी के लिए उसके पद के अनुसार एक सुपरन्यूमरेरी यानी व्यक्तिगत अतिरिक्त पद बनाया जाएगा। इसके बदले उसी कैडर का एक रेगुलर पद फ्रीज रहेगा। कर्मचारी के रिटायर होने या सेवा छोड़ने के बाद अतिरिक्त पद खत्म हो जाएगा और फ्रीज किया गया रेगुलर पद दोबारा खुल जाएगा।
मानव संसाधन विभाग की ओर से 1 सितंबर को सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, बोर्ड-निगमों के प्रबंध निदेशकों, मंडल आयुक्तों और उपायुक्तों को इस संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं। विभागों को साफ कहा गया है कि किसी पात्र कर्मचारी का केस केवल विभागीय कार्रवाई में देरी के कारण लंबित नहीं रहना चाहिए। पूरी प्रक्रिया सिक्योरिटी ऑफ सर्विस पोर्टल के जरिए की जाएगी।
सुपरन्यूमरेरी पद क्या है और इससे नौकरी कैसे सुरक्षित होगी?
सुपरन्यूमरेरी पद सामान्य खाली पद की तरह नहीं होगा। यह संबंधित पात्र कर्मचारी के लिए बनाया गया व्यक्तिगत पद होगा और उस पर किसी दूसरे व्यक्ति की नियुक्ति नहीं की जा सकेगी।
मान लीजिए किसी विभाग में एक पात्र कर्मचारी क्लर्क के पद के बराबर काम कर रहा है। उसकी सेवा सुरक्षा का केस मंजूर होने पर उसके लिए क्लर्क कैडर के अनुरूप सुपरन्यूमरेरी पद बनाया जाएगा। जब तक वह कर्मचारी सेवा में रहेगा, यह पद भी बना रहेगा।
हर सुपरन्यूमरेरी पद के बदले उसी कैडर का एक रेगुलर पद होल्ड पर रखा जाएगा। इससे सेवा सुरक्षा प्राप्त कर्मचारी को केवल इस आधार पर हटाने की स्थिति नहीं बनेगी कि उसके लिए अलग स्वीकृत पद उपलब्ध नहीं है।
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क्या कच्चे कर्मचारी रेगुलर हो जाएंगे?
हरियाणा कॉन्ट्रैक्चुअल एम्प्लॉइज (सिक्योरिटी ऑफ सर्विस) एक्ट, 2024 पात्र अनुबंधित कर्मचारियों को सेवा सुरक्षा देता है। कानून में पात्र कर्मचारी के सुपरएनुएशन यानी तय रिटायरमेंट उम्र तक सेवा में बने रहने का प्रावधान है, लेकिन इससे उसे अपने आप रेगुलर कर्मचारी का दर्जा नहीं मिल जाता।
इसलिए नए आदेश का मतलब यह नहीं है कि सरकार सभी कच्चे कर्मचारियों को पक्का कर रही है। नया सिस्टम पहले से बने सेवा सुरक्षा कानून को विभागों में लागू करने और पात्र कर्मचारियों के लिए पद का ढांचा तय करने से जुड़ा है।
किन कच्चे कर्मचारियों को मिलेगा इस सिस्टम का फायदा?
इस आदेश का फायदा हर अनुबंधित कर्मचारी को अपने आप नहीं मिलेगा। कर्मचारी को 2024 के सेवा सुरक्षा एक्ट और 2025 के नियमों के तहत पात्र होना जरूरी है।
मूल कानून के अनुसार पात्रता की प्रमुख शर्तों में 15 अगस्त 2024 को सरकारी विभाग, बोर्ड, निगम या प्राधिकरण में सेवा में होना और उस तारीख तक कम से कम 5 साल की फुल टाइम कॉन्ट्रैक्ट सर्विस पूरी करना शामिल है। सेवा की गणना में तय अवधि में कम से कम 240 दिन का वेतन मिलने का नियम भी है।
सीधे सरकारी संगठन द्वारा कॉन्ट्रैक्ट पर लगाए गए कर्मचारियों के लिए मूल कानून में 15 अगस्त 2024 को 50 हजार रुपये तक मासिक पारिश्रमिक की शर्त भी दी गई है। ऑनरेरियम, पार्ट टाइम और कुछ दूसरी कैटेगरी को कानून से बाहर रखा गया है।
क्या एचकेआरएन कर्मचारियों को भी मिलेगा फायदा?
हरियाणा कौशल रोजगार निगम के जरिए डिप्लॉय किए गए कर्मचारी भी सेवा सुरक्षा कानून के दायरे में आ सकते हैं।
कानून में एचकेआरएन की डिप्लॉयमेंट ऑफ कॉन्ट्रैक्चुअल पर्सन्स पॉलिसी-2022 के तहत काम कर रहे कर्मचारियों के लिए अलग प्रावधान है। हालांकि उन्हें भी कानून में दी गई बाकी पात्रता शर्तें पूरी करनी होंगी।
इसलिए केवल एचकेआरएन के जरिए नौकरी करने से अपने आप सेवा सुरक्षा नहीं मिलेगी। कर्मचारी का पात्रता रिकॉर्ड और सर्विस अवधि भी जांची जाएगी।
रेगुलर पद फ्रीज होने से नई भर्ती का क्या होगा?
नए सिस्टम में जितने सुपरन्यूमरेरी पद बनाए जाएंगे, उनके बराबर संबंधित कैडर के रेगुलर पद होल्ड पर रखे जाएंगे।
जब तक सेवा सुरक्षा वाला कर्मचारी नौकरी में है, उस संबंधित फ्रीज पद को सामान्य भर्ती से नहीं भरा जा सकेगा। लेकिन कर्मचारी के रिटायर होने, इस्तीफा देने या किसी अन्य कारण से सेवा समाप्त होने पर उसका सुपरन्यूमरेरी पद खत्म हो जाएगा और उससे जुड़ा रेगुलर पद फिर उपलब्ध हो जाएगा।
इसका मतलब यह भी नहीं है कि किसी पूरे विभाग में सभी रेगुलर भर्तियां बंद हो जाएंगी। रोक केवल उन रेगुलर पदों पर होगी जिन्हें संबंधित सुपरन्यूमरेरी पद के बदले होल्ड पर रखा गया है।
विभाग में कर्मचारी ज्यादा और रेगुलर पद कम हुए तो क्या होगा?
सरकार ने इस स्थिति के लिए भी व्यवस्था तय की है।
अगर किसी विभाग में सेवा सुरक्षा प्राप्त कर्मचारियों की संख्या उपलब्ध रेगुलर पदों से ज्यादा है तो सभी पात्र कर्मचारियों के लिए पहले सुपरन्यूमरेरी पद बनाए जाएंगे। इसके बाद जितने कर्मचारी उपलब्ध पदों में एडजस्ट नहीं हो पाएंगे, उनकी सूची मानव संसाधन विभाग को भेजी जाएगी।
सरकार के निर्देश के अनुसार संबंधित कैडर में पद कम पड़ने पर जूनियर कर्मचारियों को सरप्लस माना जाएगा। मानव संसाधन विभाग ऐसे कर्मचारियों को उन दूसरे विभागों में एडजस्ट करने की प्रक्रिया करेगा जहां उपयुक्त खाली पद उपलब्ध हैं।
दूसरे विभाग में एडजस्टमेंट होने के बाद पुराने विभाग में उस कर्मचारी के नाम से बनाया गया सुपरन्यूमरेरी पद खत्म हो जाएगा।
कर्मचारी को खुद नया आवेदन करना होगा?
1 सितंबर के नए आदेश को नई रजिस्ट्रेशन विंडो नहीं समझना चाहिए।
यह निर्देश मुख्य रूप से विभागों को पात्र कर्मचारियों के लंबित मामलों को आगे बढ़ाने, सुपरन्यूमरेरी पद बनाने, रेगुलर पद होल्ड पर रखने और जरूरत पड़ने पर सरप्लस कर्मचारियों का ब्यौरा मानव संसाधन विभाग को भेजने के लिए दिए गए हैं।
सरकार पहले ही सिक्योरिटी ऑफ सर्विस पोर्टल के जरिए आवेदन, डीडीओ वेरिफिकेशन और विभागाध्यक्ष स्तर की मंजूरी की व्यवस्था कर चुकी है। पुराने निर्देशों में साफ किया गया था कि सेवा सुरक्षा के केस ऑनलाइन सिस्टम के जरिए ही प्रोसेस होंगे। जुलाई और अगस्त 2026 में पोर्टल से जुड़ी समयसीमा के लिए भी मानव संसाधन विभाग ने अलग निर्देश जारी किए थे।
सेवा सुरक्षा मिलने के बाद कर्मचारी को क्या फायदा होता है?
2024 के कानून में पात्र कर्मचारी को तय रिटायरमेंट उम्र तक सेवा जारी रखने का प्रावधान है। इसके साथ संबंधित पद के पे लेवल के आधार पर पारिश्रमिक तय करने और सेवा अवधि के हिसाब से अतिरिक्त पारिश्रमिक का भी प्रावधान किया गया है।
कानून में सेवा अवधि के आधार पर एंट्री पे के ऊपर 5 प्रतिशत, 10 प्रतिशत या 15 प्रतिशत अतिरिक्त पारिश्रमिक की व्यवस्था है। इसके अलावा स्वास्थ्य लाभ, ग्रेच्युटी और मातृत्व लाभ जैसे प्रावधान भी कानून के शेड्यूल में शामिल हैं।
अब 1 सितंबर के ताजा आदेश का फोकस यह सुनिश्चित करना है कि पात्र कर्मचारियों के लिए वास्तविक पद का सिस्टम तैयार हो और केवल पद उपलब्ध नहीं होने की वजह से सेवा सुरक्षा की प्रक्रिया अटकी न रहे।










