सरकारी योजना से जुड़कर फरीदाबाद की पार्वती कमा रहीं 20 हजार महीना, जानें आप कैसे उठा सकते हैं योजना का लाभ
लोकल हरियाणा, सक्सेस स्टोरी। फरीदाबाद के अटाली गांव की पार्वती स्वयं सहायता समूह से जुड़कर हर्बल साबुन, अगरबत्ती और मोमबत्ती बनाकर महीने में करीब 20 हजार रुपये तक कमाई कर रही हैं। शनिवार, 26 सितंबर 2026 को हरियाणा सूचना…

- साबुन, अगरबत्ती और मोमबत्ती बनाकर ₹20 हजार तक कमाई
- स्वयं सहायता समूह से जुड़कर मिला ट्रेनिंग और वित्तीय सहायता का रास्ता
- ग्रामीण महिलाएं जिला या ब्लॉक मिशन यूनिट के जरिए जुड़ सकती हैं
लोकल हरियाणा, सक्सेस स्टोरी। फरीदाबाद के अटाली गांव की पार्वती स्वयं सहायता समूह से जुड़कर हर्बल साबुन, अगरबत्ती और मोमबत्ती बनाकर महीने में करीब 20 हजार रुपये तक कमाई कर रही हैं। शनिवार, 26 सितंबर 2026 को हरियाणा सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने उनकी कहानी साझा करते हुए बताया कि पार्वती को हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद सरकारी सहायता और लोन का सहारा मिला। अब वह अपना काम चलाने के साथ दूसरी महिलाओं को भी इन उत्पादों को बनाने की ट्रेनिंग दे रही हैं।
लखपति दीदी बनीं पार्वती, दूसरी महिलाओं को भी दे रहीं ट्रेनिंग
पार्वती अटाली गांव की रहने वाली हैं। वह हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं और इसके बाद हर्बल साबुन, अगरबत्ती तथा मोमबत्ती जैसे उत्पाद बनाने का काम शुरू किया।
सरकारी जानकारी के अनुसार उन्हें इस काम के लिए सहायता और लोन मिला। हालांकि पार्वती को कितनी राशि का लोन मिला और उन्होंने कारोबार कितनी पूंजी से शुरू किया, इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
अब उनकी कमाई महीने में 20 हजार रुपये तक पहुंच गई है। यह रकम उनकी मासिक कमाई बताई गई है, इसे शुद्ध मुनाफा नहीं बताया गया है। पार्वती अपने काम तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दूसरी महिलाओं को भी उत्पाद बनाने की ट्रेनिंग दे रही हैं।
आखिर लखपति दीदी योजना क्या है?
लखपति दीदी सीधे खाते में एक लाख रुपये देने वाली अलग कैश योजना नहीं है। यह दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की आमदनी बढ़ाने की पहल है। हरियाणा में इस मिशन को हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन लागू करता है। मिशन का फोकस महिलाओं को स्वयं सहायता समूह से जोड़कर ट्रेनिंग, वित्तीय सहायता, बैंक लोन और रोजगार या कारोबार के अवसरों तक पहुंच उपलब्ध कराना है।
आधिकारिक लखपति दीदी पोर्टल के अनुसार ऐसी स्वयं सहायता समूह सदस्य को लखपति दीदी माना जाता है जिसकी सालाना पारिवारिक आय एक लाख रुपये या उससे अधिक और औसत मासिक आय कम से कम 10 हजार रुपये हो तथा यह आमदनी कम से कम चार कृषि मौसम या चार बिजनेस साइकल तक बनी रहे।
पार्वती के मामले में सरकारी जानकारी में उनकी वर्तमान कमाई महीने में करीब 20 हजार रुपये तक बताई गई है।
स्वयं सहायता समूह से जुड़कर जमाल की शारदा ने 10 हजार से शुरू किया काम, अब हर महीने कमाती हैं 25 हजार
आप कैसे जुड़ सकते हैं इस योजना से?
हरियाणा की ग्रामीण महिला के लिए इसकी शुरुआत स्वयं सहायता समूह से जुड़ने से होती है। हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के ब्लॉक स्तर पर कार्यरत टीमें ग्रामीण परिवारों की महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने, समूहों को मजबूत करने और आजीविका गतिविधियों के लिए ट्रेनिंग देने का काम करती हैं।
जो महिला अभी किसी स्वयं सहायता समूह से नहीं जुड़ी है, वह अपने जिले या ब्लॉक की हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन यूनिट से संपर्क कर सकती है। एचएसआरएलएम की आधिकारिक जानकारी के अनुसार ग्रामीण महिलाएं और स्वयं सहायता समूह जिला या ब्लॉक मिशन यूनिट के माध्यम से कार्यक्रमों में शामिल हो सकते हैं।
इसके बाद महिला की रुचि और स्थानीय बाजार के अनुसार सिलाई, खाद्य उत्पाद, डेयरी, कृषि, ब्यूटी पार्लर, दुकान, हस्तशिल्प या दूसरे आजीविका कार्यों के लिए ट्रेनिंग और वित्तीय लिंक उपलब्ध कराया जा सकता है। हरियाणा में अलग-अलग स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं इसी मॉडल से अपने कारोबार शुरू कर चुकी हैं।
क्या हर महिला को एक लाख रुपये का लोन मिलता है?
नहीं। लखपति दीदी बनने पर एक लाख रुपये का कोई निश्चित व्यक्तिगत लोन नहीं मिलता। सहायता महिला के काम, स्वयं सहायता समूह और उपलब्ध योजना के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
केंद्रीय लखपति दीदी पोर्टल के अनुसार पात्र स्वयं सहायता समूहों को 20 से 30 हजार रुपये तक रिवॉल्विंग फंड और अधिकतम 2.50 लाख रुपये तक कम्युनिटी इनवेस्टमेंट फंड उपलब्ध हो सकता है। स्वयं सहायता समूहों के लिए बिना गिरवी बैंक लोन की सीमा 20 लाख रुपये तक बताई गई है। ये राशियां समूह स्तर की वित्तीय व्यवस्थाएं हैं, हर महिला को मिलने वाली तय नकद राशि नहीं हैं।
हरियाणा में भी महिलाओं को मिलने वाली रकम उनके काम के अनुसार अलग रही है। उदाहरण के लिए एचएसआरएलएम की एक आधिकारिक सफलता कहानी में कैथल की कमलेश ने स्वयं सहायता समूह से 60 हजार रुपये लेकर ब्यूटी पार्लर और जनरल स्टोर शुरू किया, जबकि सिरसा की कैलाश देवी को बैंक लोन और कम्युनिटी इनवेस्टमेंट फंड के जरिए सरसों तेल इकाई शुरू करने में सहायता मिली।
लखपति दीदी बनने की प्रक्रिया क्या है?
आधिकारिक प्रक्रिया में संभावित महिलाओं की पहचान के बाद उन्हें अलग-अलग आजीविका मॉडल की ट्रेनिंग, स्किल डेवलपमेंट और जरूरत के अनुसार वित्तीय व बाजार सहायता से जोड़ा जाता है। परिवार के लिए एक आजीविका योजना भी तैयार की जा सकती है और कमाई की नियमित निगरानी की जाती है।
संभावित लखपति दीदी की पहचान के लिए आधिकारिक पोर्टल पर स्वयं सहायता समूह में कम से कम दो वर्ष पूरे करने और आजीविका गतिविधियों से जुड़ने जैसे मानदंड दिए गए हैं। हालांकि पोर्टल साफ करता है कि ये सांकेतिक मानदंड हैं और राज्य अपने स्तर पर भी पहचान के मानदंड तय कर सकते हैं।
हरियाणा में योजना से जुड़ने की जानकारी के लिए अपने जिले की एचएसआरएलएम यूनिट से संपर्क किया जा सकता है। विभाग ने सभी जिलों के संपर्क नंबर भी अपनी वेबसाइट पर उपलब्ध कराए हैं।








