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पानीपत में अधिग्रहित जमीन का मुआवजा बढ़ा, हाई कोर्ट ने 78 लाख रुपये प्रति एकड़ तय किया

चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने बुधवार, 23 सितंबर 2026 को पानीपत के सिवाह गांव में भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामले में अधिग्रहित जमीन का बाजार मूल्य 78 लाख रुपये प्रति एकड़ तय किया है। जस्टिस जगमोहन बंसल ने जमीन मा…

पानीपत सिवाह जमीन अधिग्रहण मामले में हाई कोर्ट ने 78 लाख रुपये प्रति एकड़ बाजार मूल्य तय किया
पानीपत सिवाह जमीन अधिग्रहण मामले में हाई कोर्ट ने 78 लाख रुपये प्रति एकड़ बाजार मूल्य तय किया
खबर की मुख्य बातें
  • सिवाह की अधिग्रहित जमीन का मूल्य 78 लाख रुपये प्रति एकड़
  • कलेक्टर ने 2013 में तय किए थे 40 लाख रुपये प्रति एकड़
  • जमीन मालिकों की अपील मंजूर, राज्य की अपीलें खारिज

चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने बुधवार, 23 सितंबर 2026 को पानीपत के सिवाह गांव में भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामले में अधिग्रहित जमीन का बाजार मूल्य 78 लाख रुपये प्रति एकड़ तय किया है। जस्टिस जगमोहन बंसल ने जमीन मालिकों की अपील स्वीकार करते हुए हरियाणा सरकार की अपीलें खारिज कर दीं। यह जमीन 25 एमएलडी क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण के लिए अधिग्रहित की गई थी।

मामले में पहले भूमि अधिग्रहण कलेक्टर ने जमीन का बाजार मूल्य 40 लाख रुपये प्रति एकड़ तय किया था। इसके बाद रेफरेंस कोर्ट ने इसे बढ़ाकर 64 लाख 64 हजार 102 रुपये प्रति एकड़ कर दिया था। अब हाई कोर्ट ने उपलब्ध बिक्री विलेखों और जमीन की स्थिति को देखते हुए बाजार मूल्य 78 लाख रुपये प्रति एकड़ निर्धारित किया है।

2013 में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए हुआ था अधिग्रहण

हरियाणा सरकार ने सिवाह गांव में 25 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने के लिए भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 की धारा 4 के तहत 28 फरवरी 2013 को अधिसूचना जारी की थी। इसके बाद 16 अप्रैल 2013 को धारा 6 की अधिसूचना जारी हुई।

भूमि अधिग्रहण कलेक्टर ने 26 सितंबर 2013 को अवॉर्ड जारी करते हुए जमीन का बाजार मूल्य 40 लाख रुपये प्रति एकड़ निर्धारित किया था। इससे असंतुष्ट जमीन मालिकों ने ज्यादा मुआवजे की मांग को लेकर मामला आगे बढ़ाया।

रेफरेंस कोर्ट ने 23 जनवरी 2017 को जमीन का मूल्य बढ़ाकर 64 लाख 64 हजार 102 रुपये प्रति एकड़ कर दिया। इसके बाद जमीन मालिक ज्यादा मुआवजे की मांग लेकर हाई कोर्ट पहुंचे, जबकि राज्य सरकार की ओर से भी रेफरेंस कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई।

बिक्री विलेखों में एक करोड़ रुपये प्रति एकड़ से ज्यादा तक मूल्य

हाई कोर्ट के सामने जमीन मालिकों की ओर से 2010 से 2014 के बीच के कई बिक्री विलेख पेश किए गए। 25 मई 2010 के दो बिक्री विलेखों के आधार पर जमीन का प्रति एकड़ मूल्य करीब एक करोड़ रुपये से ज्यादा निकल रहा था।

एक बिक्री विलेख में प्रति एकड़ मूल्य 1 करोड़ 91 हजार 331 रुपये और दूसरे में 1 करोड़ 2 लाख 13 हजार 333 रुपये दर्ज था। अगस्त 2014 के एक अन्य सौदे में मूल्य करीब 82 लाख 47 हजार रुपये प्रति एकड़ था।

राज्य सरकार ने भी 2012 के बिक्री विलेख पेश किए थे, जिनसे जमीन का मूल्य करीब 35 लाख से 40 लाख रुपये प्रति एकड़ निकल रहा था। कोर्ट ने पाया कि जमीन मालिकों की ओर से पेश किए गए कुछ बिक्री विलेख अधिग्रहित जमीन के ज्यादा करीब थे और राज्य ने इन लेन-देन की वास्तविकता पर भी सवाल नहीं उठाया था।

78 लाख रुपये प्रति एकड़ कैसे तय हुआ बाजार मूल्य

हाई कोर्ट ने 2010 के बिक्री विलेखों में करीब एक करोड़ रुपये प्रति एकड़ के मूल्य को आधार बनाते हुए समय के अंतर के लिए करीब 30 प्रतिशत बढ़ोतरी पर विचार किया। इससे मूल्य लगभग 1.30 करोड़ रुपये प्रति एकड़ बनता था।

हालांकि ये बिक्री विलेख जमीन के छोटे हिस्सों से जुड़े थे। इसलिए कोर्ट ने जमीन के आकार को देखते हुए 40 प्रतिशत कटौती लागू की। इस गणना से बाजार मूल्य 78 लाख रुपये प्रति एकड़ निकलकर आया।

कोर्ट ने 2013 और 2014 के दूसरे बिक्री विलेखों को भी देखा। अलग-अलग समय और जमीन के आकार के अनुसार बढ़ोतरी, कमी और कटौती लगाने पर इनसे करीब 70 लाख से 86 लाख रुपये प्रति एकड़ के बीच मूल्य निकल रहा था। इसके बाद कोर्ट ने 78 लाख रुपये प्रति एकड़ का मूल्य उचित माना।

पुराने अवॉर्ड को सीधे आधार मानने पर कोर्ट ने क्या कहा

हाई कोर्ट ने कहा कि जब संबंधित अवधि के वास्तविक और तुलनीय बिक्री विलेख उपलब्ध हों तो केवल पुराने अधिग्रहण अवॉर्ड के आधार पर बाजार मूल्य तय करना उचित नहीं है।

कोर्ट ने माना कि पुराने फैसले या अवॉर्ड साक्ष्य के रूप में देखे जा सकते हैं, लेकिन जमीन का मूल्य तय करते समय संबंधित जमीन की स्थिति, दूरी, आकार और वास्तविक बिक्री लेन-देन पर भी विचार करना जरूरी है।

अंत में हाई कोर्ट ने अधिग्रहित जमीन का बाजार मूल्य 78 लाख रुपये प्रति एकड़ तय करते हुए जमीन मालिकों की अपीलें स्वीकार कर लीं और राज्य सरकार की अपीलें खारिज कर दीं।

लेखक

Sandeep Kumar

संदीप कुमार LocalHaryana.com के संस्थापक और संपादक हैं। वे वर्ष 2020 से डिजिटल पत्रकारिता और ऑनलाइन समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। वे मुख्य रूप से हरियाणा समाचार, सरकारी योजनाएं, नौकरियां, शिक्षा, खेतीबाड़ी और मौसम से जुड़े विषयों पर लेखन और संपादन करते हैं। उनका प्रयास पाठकों तक तथ्य आधारित, स्पष्ट और उपयोगी जानकारी सरल हिंदी में पहुँचाना है। LocalHaryana.com पर प्रकाशित सामग्री उपलब्ध आधिकारिक सूचनाओं और विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर तैयार की जाती है।

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