हरियाणा में सरकारी भुगतान में देरी पर मिलेगा ब्याज, जिम्मेदार अधिकारी की सैलरी से कटेगी रकम: CM सैनी का बड़ा आदेश
लोकलहरियाणा, चंडीगढ़ – हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सोमवार 28 सितंबर 2026 को हरियाणा सिविल सचिवालय में विभिन्न विभागों की 'गुड प्रेक्टिसिज' की समीक्षा बैठक में सभी सरकारी विभागों को निर्देश दिया कि अगर किसी…

लोकलहरियाणा, चंडीगढ़ – हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सोमवार 28 सितंबर 2026 को हरियाणा सिविल सचिवालय में विभिन्न विभागों की ‘गुड प्रेक्टिसिज’ की समीक्षा बैठक में सभी सरकारी विभागों को निर्देश दिया कि अगर किसी विभाग की वजह से ठेकेदारों, फर्मों या कंपनियों का बिल समय पर नहीं चुकता, तो उन्हें देरी की अवधि का ब्याज सहित भुगतान किया जाएगा। साथ ही, जिस अधिकारी या कर्मचारी की गलती से देरी होगी, उससे ब्याज की रकम वसूली की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने वित्त विभाग को यह योजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने साफ कहा कि विभागीय देरी का बोझ ठेकेदार पर नहीं पड़ना चाहिए। इससे न केवल परियोजनाओं की गुणवत्ता प्रभावित होती है, बल्कि काम पूरा होने में भी देरी होती है।
बैठक में वित्त एवं योजना विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अरुण गुप्ता ने बताया कि हरियाणा देश का एकमात्र राज्य है जहां एसपीवी-अर्जुन काउंसिल के जरिए 4000 करोड़ रुपये के विकास कार्यों को परिणाम-आधारित बनाया गया है।
ब्याज योजना कैसे काम करेगी और किनका फायदा होगा
सरकार अब उन सभी मामलों में ब्याज देगी जहां विभागीय स्तर पर अनावश्यक विलंब हुआ हो। वित्त विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वे एक समुचित योजना तैयार करें जिसमें स्पष्ट प्रक्रिया, जिम्मेदारी तय करना, ब्याज दर और समयबद्ध निपटारा शामिल हो।
अगर किसी अधिकारी या कर्मचारी के स्तर पर अनावश्यक विलंब की वजह से भुगतान समय पर नहीं हो पाता, तो ब्याज राशि की वसूली संबंधित जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी से की जाएगी। यह प्रावधान प्रस्तावित योजना में शामिल करने के निर्देश CM ने दिए हैं।
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कंपनियों, फर्मों और ठेकेदारों के लिए सीधा फायदा: समय पर भुगतान न मिलने पर वित्तीय भार नहीं पड़ेगा, देरी का खामियाजा सरकार भुगतान करेगी और शिकायत निवारण की स्पष्ट प्रक्रिया बनेगी।
हरियाणा में पहले से ई-बिलिंग सिस्टम 1 अप्रैल 2013 से लागू है, जिसमें अब तक 15.52 लाख से ज्यादा बिल तैयार किए जा चुके हैं। पेपरलेस वौचर वेतन भुगतान के लिए 13 अगस्त 2020 से शुरू हुए और मई 2026 से कागजरहित वेतन प्रक्रिया पूरी तरह लागू हो गई है।
वेतन सीधा कर्मचारी के खाते में, कॉन्ट्रैक्टर को नहीं
मुख्यमंत्री ने भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए कई बड़े निर्देश दिए हैं। राज्य में सभी प्रकार के कर्मचारियों, चाहे वे किसी एजेंसी के माध्यम से कार्यरत हों, का वेतन अब कॉन्ट्रैक्टर को देने की बजाय सीधा कर्मचारियों के खातों में भिजवाया जाएगा। इससे कॉन्ट्रैक्टर द्वारा की जाने वाली गड़बड़ियों पर अंकुश लगेगा।
यदि किसी डिजिटल सिग्नेचर या डोंगल का गलत इस्तेमाल होता है, तो वह अधिकारी जिम्मेदार होगा जिसे वह जारी किया गया है। सरकार को हुए नुकसान की भरपाई उसके वेतन से की जाएगी।
हरियाणा में सभी प्रकार के बिलों के डिजिटल प्रसंस्करण की ई-वाउचर के माध्यम से शुरुआत की गई है। राज्य में वेतन प्रक्रिया को 100 प्रतिशत डिजिटल किया गया है और भौतिक वेतन बिलों तथा मैनुअल कागजी कार्य को समाप्त किया गया है। सभी केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए एसएनए स्पर्श (समयोचित प्रणाली एकीकृत शीघ्र हस्तांतरण) लागू किया गया है। लगभग 16,000 कार्यान्वयन एजेंसियों के लिए डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र को अनिवार्य बनाया गया है।
अर्जुन परिषद और ई-स्टांपिंग में हरियाणा की उपलब्धि
वित्त एवं योजना विभाग द्वारा पूरे देश में हरियाणा एकमात्र ऐसा राज्य है जहां एक साल पहले एसपीवी-अर्जुन (स्पेशल पर्पज व्हीकल-एआई फॉर रेजिलिएंट जॉब्स, अर्बन एयर क्वालिटी एंड नेक्स्ट-जेन स्किल्स) काउंसिल गठित की गई थी। सभी 9 बड़े विभागों के बजट व कार्यों की निगरानी और स्वतंत्र सत्यापन किया जाता है। 4000 करोड़ रुपये के विकास कार्यों को पूरी तरह परिणाम आधारित बनाया गया है। निर्धारित परिणामों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होने के बाद ही धनराशि जारी की जाती है।
कोषागार एवं लेखा विभाग के आयुक्त एवं सचिव सीजी रजनीकांथन ने बताया कि हरियाणा देश का पहला राज्य है जिसने ई-स्टांपिंग की व्यवस्था अपने स्तर पर शुरू की। नागरिकों को धोखाधड़ी से बचाने के लिए इसमें सत्यापन की व्यवस्था व सुरक्षा मानक लागू किए गए हैं। वर्ष 2025-26 में 62,39,868 ई-स्टांप प्रमाणपत्र जारी किए गए, जिनकी कुल राशि लगभग 13,64,965 लाख रुपये रही।
बैठक में सिंधु-गंगा-ब्रह्मपुत्र के मैदानी क्षेत्र में स्वच्छ वायु के लिए राज्यों के बीच सहयोग बढ़ाने हेतु मुख्यमंत्रियों का स्वच्छ वायु मंच बनाने की परिकल्पना प्रस्तुत की गई। इसके अंतर्गत हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार को एक साझा वायु क्षेत्र के रूप में देखते हुए सामूहिक रणनीति अपनाने का प्रस्ताव है।
बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण गुप्ता, अतिरिक्त मुख्य सचिव एके सिंह, विजयेंद्र कुमार, आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल तथा निगरानी एवं समन्वय की विशेष सचिव डॉ. प्रियंका सोनी सहित अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद थे।
वित्त विभाग को योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। आधिकारिक नोटिफिकेशन आने के बाद ब्याज दर, प्रक्रिया और पात्रता की विस्तृत जानकारी उपलब्ध होगी।








