हरियाणा में युवाओं के नए आईडिया को सरकार देगी उड़ान, मिलेगी 1 लाख की सीड फंडिंग
चंडीगढ़। हरियाणा में विश्वविद्यालयों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के इनोवेटिव आइडिया को सरकारी जरूरतों और जमीनी समस्याओं के समाधान से जोड़ने के लिए नई ‘नवाचार’ योजना तैयार की गई है। मंगलवार, 29 सितंबर को मुख्यमंत्री नाय…

- नवाचार योजना को 29 सितंबर को मिली सैद्धांतिक मंजूरी
- चयनित प्रस्तावों को डीपीआर के लिए 1 लाख रुपये तक फंडिंग
- जमीनी समस्याओं पर शोध के लिए एक जिले में पायलट की तैयारी
चंडीगढ़। हरियाणा में विश्वविद्यालयों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के इनोवेटिव आइडिया को सरकारी जरूरतों और जमीनी समस्याओं के समाधान से जोड़ने के लिए नई ‘नवाचार’ योजना तैयार की गई है। मंगलवार, 29 सितंबर को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई हरियाणा स्टेट इनोवेशन सोसाइटी की पहली जनरल बॉडी बैठक में योजना पर विस्तृत चर्चा के बाद इसे सैद्धांतिक मंजूरी दी गई।
योजना के तहत राज्य की प्राथमिकताओं से जुड़े चयनित शोध प्रस्तावों को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर तैयार करने के लिए 1 लाख रुपये तक की शुरुआती सीड फंडिंग दी जा सकेगी। इसके अलावा विद्यार्थियों की ऐसी नई तकनीक, समाधान या आइडिया को भी सरकार सहयोग देगी, जो प्रदेश की किसी वास्तविक समस्या को हल करने में उपयोगी हो सकते हैं।
‘आइडिया से इनोवेशन और इनोवेशन से समाधान’ की अवधारणा पर तैयार इस योजना का पूरा नाम ‘हरियाणा नेटवर्क फॉर एकेडमिक विजन, अपलाइड क्रिएटिविटी एवं हॉलिस्टिक एडमिनिस्ट्रेटिव रिसर्च (नवाचार) योजना’ है। बैठक में एजेंडे के विभिन्न बिंदुओं पर क्रमवार चर्चा करते हुए आवश्यक निर्णय भी लिए गए।
योजना का उद्देश्य प्रदेश के विश्वविद्यालयों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों की रचनात्मक और नवाचार क्षमता को वास्तविक चुनौतियों से जोड़ना है। सरकार ऐसे शोध और नवाचार को बढ़ावा देना चाहती है, जिनके नतीजों का इस्तेमाल नीतियां बनाने और योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करने में किया जा सके।
योजना के तहत यदि कोई विद्यार्थी नई तकनीक, समाधान या ऐसा आइडिया प्रस्तुत करता है, जो प्रदेश की किसी वास्तविक समस्या के समाधान में उपयोगी हो सकता है, तो उसके विचार को प्रोटोटाइप और समाधान के रूप में विकसित करने के लिए सरकार की ओर से सीड फंडिंग उपलब्ध कराई जाएगी।
लैब से फील्ड और फील्ड से नीति तक जाएंगे शोध प्रोजेक्ट
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि योजना के तहत शोध परियोजनाओं को ‘लैब से फील्ड और फील्ड से नीति’ की अवधारणा के अनुसार आगे बढ़ाया जाएगा। इसका उद्देश्य विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों में विकसित ज्ञान, तकनीक और नवाचार को वास्तविक परिस्थितियों में परखना और सफल नतीजों को सरकारी विभागों और आम लोगों के हित में उपयोग करना है।
नवाचार योजना के तहत शोध परियोजनाओं को राज्य के दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों और प्राथमिकताओं से जोड़ा जाएगा। इनमें विकसित हरियाणा@2047, सतत विकास लक्ष्य यानी एसडीजी, डिजिटल गवर्नेंस, हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग, टिकाऊ कृषि, शहरी प्रबंधन और सामाजिक-आर्थिक समावेशन जैसे प्रमुख विषय शामिल होंगे।
राज्य सरकार की जरूरतों के अनुसार नए और उभरते विषयों पर भी शोध परियोजनाएं ली जा सकेंगी। इसका उद्देश्य बदलती प्रशासनिक, तकनीकी और सामाजिक जरूरतों के अनुरूप विशेषज्ञ ज्ञान और नए समाधान उपलब्ध कराना है।
विश्वविद्यालय और शोधकर्ता होंगे योजना के प्रमुख सहभागी
योजना के तहत हरियाणा में स्थित पात्र विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को राज्य की प्राथमिकताओं से जुड़े विषयों पर शोध परियोजनाएं प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।
प्रस्तावों के शुरुआती परीक्षण और मूल्यांकन के बाद चयनित प्रस्तावों को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने के लिए 1 लाख रुपये तक की शुरुआती सीड फंडिंग दी जा सकेगी। इसके बाद संबंधित विभाग के समन्वय से तैयार डीपीआर को परियोजना लागू करने के लिए जरूरी अंतिम वित्तीय मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।
सरकार के अनुसार इससे हरियाणा में शोध और नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा मिलने के साथ शासन को डेटा, तकनीक और अकादमिक विशेषज्ञता पर आधारित नए और व्यावहारिक समाधान उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
जमीनी समस्याओं का समाधान बने नवाचार और अनुसंधान
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में नवाचार और अनुसंधान को केवल अकादमिक गतिविधि तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि इन्हें जमीनी समस्याओं के व्यावहारिक और स्थायी समाधान से जोड़ा जाना चाहिए। ऐसा शोध होना चाहिए, जिससे समाज और प्रदेश के सामने मौजूद वास्तविक चुनौतियों का प्रभावी समाधान तैयार हो सके।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश के विभिन्न शोध संस्थानों और विशेषज्ञ संस्थाओं के साथ तालमेल बनाकर एक जिले में पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की संभावनाएं तलाशी जाएं।
इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत ऐसे क्षेत्रों में भूमिगत जल की गुणवत्ता पर शोध करने को कहा गया है। इसके साथ ऐसी तकनीक विकसित करने की संभावनाओं का अध्ययन किया जाएगा, जिससे अनुपयोगी या गैर-पीने योग्य पानी को उपयोगी बनाया जा सके अथवा जरूरी तकनीकी प्रक्रिया के जरिए उसे पीने योग्य बनाने का समाधान विकसित किया जा सके।
नायब सिंह सैनी ने कहा कि शोध की गुणवत्ता और उपयोगिता पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। शोध ऐसा होना चाहिए, जिससे किसी एक विशिष्ट क्षेत्र में विशेषज्ञता और मजबूत क्षमता विकसित की जा सके और भविष्य में उस क्षेत्र से जुड़ी अलग-अलग चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।
उन्होंने कहा कि अनुसंधान का अंतिम उद्देश्य समाज को लाभ पहुंचाना और लोगों के जीवन को बेहतर बनाना होना चाहिए। इसके लिए सरकार, शोध संस्थानों, विश्वविद्यालयों, तकनीकी संस्थानों और निजी क्षेत्र के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।
गूगल इंडिया, आईआईटी दिल्ली और एनआईटी कुरुक्षेत्र से हुआ एमओयू
बैठक में बताया गया कि हरियाणा राज्य इनोवेशन मिशन के तहत गूगल इंडिया, आईआईटी दिल्ली, एनआईटी कुरुक्षेत्र सहित अन्य प्रमुख विशेषज्ञ संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापन यानी एमओयू किए गए हैं।
इन संस्थानों के सहयोग से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के बेहतर उपयोग, स्टार्टअप्स की मेंटरिंग, तकनीकी सहयोग और दूसरी जरूरी लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
इस सहयोग से प्रदेश में विकसित हो रहे नए विचारों और नवाचारों को प्रोटोटाइप से आगे बढ़ाकर व्यावहारिक समाधान के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी।
बैठक में मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर, युवा अधिकारिता एवं उद्यमिता विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव जी अनुपमा, उच्चतर शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ए के सिंह, फ्यूचर विभाग की प्रधान सचिव अपनीत पी कुमार, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित अग्रवाल, क्रिड विभाग के आयुक्त एवं सचिव जे गणेशन, फ्यूचर विभाग के निदेशक डॉ. आदित्य दहिया, मुख्यमंत्री के ओएसडी डॉ. राज नेहरू, विरेंद्र बढ़खालसा सहित अन्य अधिकारी, सोसायटी के सदस्य और गैर सरकारी सदस्य मौजूद रहे।








