हरियाणा CET पॉलिसी से ग्रुप सी पदों पर भर्ती में उम्मीदवारों की नाराजगी बढ़ी। उम्मीदवारों ने हाईकोर्ट का रुख किया।
हरियाणा सरकार की कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (CET) पॉलिसी ने ग्रुप सी पदों की भर्तियों में कई उम्मीदवारों को चिंता में डाल दिया है। यह मामला 4 अगस्त 2024 का है, जब हजारों उम्मीदवार अच्छे अंक प्राप्त करने के बावजूद नॉलेज (स्क्रीनिंग) टेस्ट में भाग लेने से वंचित रह गए हैं।
Main Points
CET पॉलिसी की समस्या
हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) ने CET पॉलिसी लागू की है, जिसके अनुसार, हर पद और कैटेगरी के लिए चार गुना उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया जाना चाहिए। लेकिन, जब यह नीति लागू की गई, तो एक समान योग्यता वाले पदों की संख्या के आधार पर चार गुना उम्मीदवार शॉर्टलिस्ट नहीं हो पाए।उम्मीदवारों ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से लेकर आयोग तक अपनी समस्याओं का समाधान मांगा है, लेकिन उनकी गुहार सुनने वाला कोई नहीं है। अब, वे पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का रुख करने की तैयारी कर रहे हैं।
उम्मीदवारों की मांग
उम्मीदवारों की मांग है कि जैसे जूनियर इंजीनियर सिविल, इलेक्ट्रिकल, पटवारी, क्लर्क और अन्य पदों के लिए एक समान पदनाम वाले पदों की संख्या जोड़कर उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया जाए। इससे अधिक संख्या में उम्मीदवार नॉलेज टेस्ट में भाग ले सकेंगे।उदाहरण के लिए, डीएचबीवीएन में जूनियर इंजीनियर सिविल के 18 पद हैं, विकास एवं पंचायत विभाग में 446, हरियाणा डेयरी डेवलपमेंट फेडरेशन में 2, हरियाणा पर्यटन निगम में 5, हाउसिंग बोर्ड में 13 और एचवीपीएनएल में 22 पद हैं।
शॉर्टलिस्टिंग की प्रक्रिया
HSSC ने जो शॉर्टलिस्ट जारी की है, उसके अनुसार, जितने पद हैं, लगभग उतने ही उम्मीदवार शॉर्टलिस्ट हुए हैं। एक ही उम्मीदवार को कई पदों के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया है। यह स्थिति सीईटी में प्राप्त अंकों को नॉलेज टेस्ट में शॉर्टलिस्टिंग का आधार बनाती है, जबकि CET क्वालीफाई नेचर का है।उम्मीदवारों ने कहा कि एक समान पदों की संख्या जोड़कर शॉर्टलिस्टिंग की जानी चाहिए थी। इससे सभी कैटेगरी के उम्मीदवारों को समान अवसर मिलते।
उम्मीदवारों की चिंताएँ
इस स्थिति से हजारों उम्मीदवारों में चिंता और निराशा का माहौल है। उन्होंने दैनिक सवेरा जैसे समाचार पत्रों के माध्यम से अपनी समस्याओं को उजागर किया है।उम्मीदवारों का कहना है कि उन्होंने अपनी समस्याओं को लेकर कई बार आयोग और सरकार से संपर्क किया, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं मिला। अब, वे हाईकोर्ट का सहारा लेने की योजना बना रहे हैं।